ऋणपत्र का क्या अर्थ है? | ऋणपत्र की विशेषता और महत्व | ऋणपत्र और बॉण्ड में अंतर | Meaning, Characteristics and Importance of Debenture in Hindi.
ऋणपत्र का अर्थ (Meaning of Debenture)
ऋणपत्र, ऋणदाता तथा कम्पनी के बीच एक अनुबन्ध होता है, जिसके अन्तर्गत कम्पनी ऋणदाता से लिये गये ऋण का ब्याज सहित भुगतान करने का वचन देती है। इसमें ऋण सम्बन्धी सभी शर्तें दी होती हैं।
ऋणपत्र (Debenture) शब्द लेटिन भाषा के 'Debere' शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ ऋणदायी (To owe) होता है। जब एक कंपनी को व्यापार के लिए दीर्घकालीन ऋण की आवश्यकता पड़ती है, तो वह ऋणपत्र निर्गमित कर जनता से धन प्राप्त करती है।
अन्य शब्दों में, 'ऋणपत्र' एक प्रपत्र है, जो किसी ऋण की प्राप्ति की स्वीकृति है तथा जो कम्पनी की सार्वमुद्रा के अधीन निर्गमित किया जाता है। इसमें उन सभी शर्तों का उल्लेख होता है, जिनके अन्तर्गत ऋण लिया गया है। ये शर्तें देय ब्याज, ऋण की वापसी तथा प्रतिभूति से सम्बन्धित होती है।
#ऋणपत्र की परिभाषा
भारतीय कम्पनी अधिनियम, 2013 की धारा 2 (30) के अनुसार, "ऋणपत्र में कम्पनी का ऋणपत्र स्कन्ध, बॉण्ड तथा कम्पनी की अन्य प्रतिभूतियाँ सम्मिलित हैं, चाहे वे कम्पनी की सम्पत्ति पर प्रभार रखती हों या नहीं।"
2. नायडू एवं दत्ता के शब्दों में, "एक ऋणपत्र कम्पनी की सार्वमुद्रा के अधीन निर्गमित ऐसा प्रपत्र है जो ऋण की स्वीकृति देता है और इन शर्तों को स्पष्ट करता है, जिसके अधीन वे निर्गमित किये गये हैं और उनका शोधन होना है।"
3. आदर्श परिभाषा (Ideal, Definition)- "ऋणपत्र ऋण की लिखित स्वीकृति होती है, जिस पर कम्पनी की सार्वमुद्रा अंकित रहती है और जिसमें निर्धारित तिथि पर मूलधन के भुगतान तक एक निश्चित दर से ब्याज के भुगतान का अनुबन्ध होता है।"
#ऋणपत्र की विशेषताएं (Characteristics or features of Debentures)
ऋणपत्र की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार से हैं
1. ऋण का प्रमाण ऋणपत्र कम्पनी द्वारा लिये गये ऋण का प्रलेख/प्रमाण है।
2. निश्चित ब्याज दर- ऋणपत्रों का निर्गमन एक निश्चित ब्याज दर पर किया जाता है।
3. वापसी का अनुबंध- ऋणपत्र में उस अवधि का स्पष्टीकरण होता है, जिसके पश्चात् मूल राशि का भुगतान किया जाता है।
4. सम्पत्तियों पर प्रभार- ऋणपत्र प्रायः कम्पनी की सम्पत्तियों पर अपना चल प्रभार (Floating Charge) रखते हैं, अतः वे सुरक्षित होते हैं।
5. दीर्घकालीन ऋण- ऋणपत्रों द्वारा लिया गया ऋण दीर्घकालीन प्रकृति का होता है।
6. सार्वमुद्रा अंकित होना प्रत्येक ऋणपत्र पर कम्पनी की सार्वमुद्रा (Common Seal) अंकित होती है।
7. विवरण- ऋणपत्र पर समस्त विवरण, जैसे- अवधि, व्याज की दर, वापसी का समय, प्रकार आदि के विवरण अंकित होते हैं।
8. ब्याज भुगतान की अवधि ऋणपत्रों पर ब्याज का भुगतान प्रत्येक 6 माह में किया जाता है। ऋणपत्र पर ब्याज देय होता है, चाहे कम्पनी को लाभ हो या हानि।
9. ऋणपत्रों का हरण (जब्ती) ऋणपत्रों पर याचना की राशि बकाया होने पर भी अंशों के समान इसका हरण नहीं किया जा सकता है
10. मताधिकार नहीं- ऋणपत्रधारी को कम्पनी में मत देने और प्रबन्ध में भाग लेने का अधिकार नहीं होता है।
#ऋणपत्रधारी की स्थिति (Status of DebentureHolders)
वास्तव में ऋणपत्रधारी कम्पनी के लेनदार होते हैं। उन्हें उनके द्वारा ऋणपत्र के माध्यम से दिये गये ऋण एवं उस पर ब्याज अनिवार्य रूप से प्राप्त होता है। चाहे कम्पनी को लाभ हो अथवा नहीं। यदि कम्पनी, निर्गमन की शर्तों के अधीन इनका भुगतान नहीं कर पाती है तो ऋणपत्रधारी न्यायालय में बाद प्रस्तुत करके अपना ऋण वसूल कर सकते हैं। उन्हें कम्पनी के प्रबन्ध एवं नियंत्रण में भाग लेने का अधिकार नहीं होता है।
#ऋणपत्रों की उपयोगिता या लाभ (Utility or Advantages of Debentures)
ऋणपत्रों की उपयोगिता या लाभ को निम्न प्रकार बताया जा सकता है :
1. वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति अंशों के निर्गमन के पश्चात् भी यदि कम्पनी को पूँजी की आवश्यकता होती है तो कम्पनी ऋणपत्र को निर्गमित कर आवश्यक राशि प्राप्त कर लेती है।
2. स्वामित्व नहीं- ऋणपत्रधारियों का कम्पनी पर स्वामित्व नहीं होने से उन्हें मताधिकार प्राप्त नहीं होता है।
3. निश्चित आय ऋणपत्रों पर निश्चित ब्याज दर होने से कम्पनी को मालूम होता है कि उसे ब्याज के रूप में कितनी राशि भुगतान करना होगी तथा ऋणपत्रधारी को ब्याज से कितनी आय प्राप्त होती रहेगी।
4. अंशधारियों को लाभ - कम व्याज दर पर ऋण उपलब्ध हो जाने पर ब्याज के पश्चात् अंशधारियों को पर्याप्त लाभांश मिल जाता है। भुगतान के
5. ऋण वापसी की सुविधा -कम्पनी के पास पर्याप्त धन उपलब्ध हो जाने पर ऋणपत्रों का भुगतान (Redemption) कर दिया जाता है।
6. ऋणपत्रधारियों को सुरक्षा-कम्पनी की सम्पत्ति पर सहायक प्रभार के रूप में होते हैं, अतः घाटे या समापन की दशा में इसके द्वारा दिया गया ऋण सुरक्षित रहता है।
7. जब्ती से मुक्त - याचनाओं का भुगतान ना होने की दशा में ऋणपत्रों को जब्त नहीं किया जा सकता है।
#ऋणपत्र स्कंध और बॉण्ड से आशय (Meaning of Debentures Stock and Bond)
कम्पनी अधिनियम द्वारा दी गई ऋणपत्रों की परिभाषा में 'ऋणपत्र स्कंध' और 'बॉण्ड' शब्द का प्रयोग किया गया है। इन दोनों को निम्नानुसार समझा जा सकता है
ऋणपत्र स्कन्ध (Debenture Stock)- अंशों(Shares) के समान ही ऋणपत्रों को भी ऋणपत्र स्कन्ध में परिवर्तित किया जा सकता है। ऋणपत्र स्कंध के अन्तर्गत छोटी-छोटी राशि के ऋणपत्रों को एकीकृत करके एक बड़ी राशि में परिवर्तित कर दिया जाता है। ऋणपत्र स्कंध को कभी भी पुनः विभाजित किया जा सकता है।
बॉण्ड (Bond)- बॉण्ड एक लिखित प्रपत्र है जो कि ऋणपत्र के समान ही ऋण का प्रमाणपत्र है। पहले परम्परागत रूप में इनका निर्गमन सरकार के द्वारा ही किया जाता था परन्तु वर्तमान में इन्हें अर्द्ध सरकारी अथवा निजी संस्थाओं द्वारा भी जारी किया जाता है।
#ऋणपत्र और बॉण्ड में अन्तर (Difference between debenture and Bond)
'ऋणपत्र' और 'बॉण्ड' शब्द का प्रयोग अब एक-दूसरे के स्थान पर किया जाता है लेकिन दोनों में एकमात्र अन्तर यह है कि पत्रों के समान बॉण्ड पर ब्याज की दर पहले से निर्धारित नहीं होती है। अत्यधिक कटौती बॉण्ड (Deep Discount Bond) और शून्य कूपन बॉण्ड (Zero Coupon Bond) का निर्गमन मूल्य कम और शोधन मूल्य अधिक होता है।

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