वित्तीय विवरण के विश्लेषण का आशय, परिभाषा एवं उपकरण।
#वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से क्या आशय है?
उत्तर: वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से आशय है, वित्तीय विवरणों में दर्शाये गये आंकड़ों को इस तरह से सरल रूप में वर्गीकृत कर प्रस्तुत करना, जिससे उनके आधार पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकें।
उदाहरण के लिये, वर्ष 2018 में A व्यवसाय को 5,00,000 रुपये का लाभ होता है तथा B व्यवसाय को 6,00,000 रु. का लाभ ऐसी दशा में लाभ की दृष्टि से B व्यवसाय अच्छा माना जावेगा। अब यह भी बताया जाये कि वर्ष में A व्यवसाय की बिक्री 20,00,000 रुपये तथा B व्यवसाय की बिक्री 30,00,000 रुपये रही है, ऐसी दशा में तुलनात्मक दृष्टि से प्रतिशत के आधार पर दोनों की लाभप्रदता होगी-
व्यवसाय A
5,00,000 x 100÷ 20,00,000 = 25%,
व्यवसाय B -
6,00,000 x 100÷ 30,00,000= 20%
इस प्रकार A व्यवसाय की लाभप्रदता की प्रवृत्ति B व्यवसाय से अच्छी मानी जायेगी। उपरोक्त तथ्य, आँकड़ों के विश्लेषण से ही स्पष्ट हुए हैं।
इस प्रकार आय विवरण तथा स्थिति विवरण में विभिन्न वित्तीय सूचनाएँ रहती हैं, जिनमें आय, व्यय, सम्पत्ति, दायित्व, पूँजी आदि मदें होती हैं। इन मदों के बीच अर्थपूर्ण सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिये जो 'विश्लेषण किया जाता है, उसे ही वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करना कहते हैं।
#वित्तीय विवरणों का विश्लेषण की परिभाषा दीजिये।
उत्तर:
जॉन मायर्स के अनुसार, ""वित्तीय विवरणों का विश्लेषण मुख्य रूप से किसी व्यवसाय के विवरणों को एक अकेले समूह द्वारा प्रकट किए गये विभिन्न वित्तीय तथ्यों के मध्य आपसी सम्बन्धों का अध्ययन करना एवं विवरणों को एक शृंखला द्वारा प्रदर्शित कर इन तथ्यों की प्रवृत्ति का अध्ययन करना है।।
वित्तीय विवरणों के विश्लेषण को निम्न रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है-
व्यवसाय की लाभप्रदता, कार्यक्षमता, आर्थिक सुदृढता तथा भविष्य की संभावनाओं का अनुमान लगाने के लिये, विभिन्न वित्तीय तथ्यों के मध्य आपसी सम्बन्ध स्थापित कर उन्हें सरल, उपयोगी एवं आसानी से समझने योग्य बनाना ही वित्तीय विवरणों का विश्लेषण कहलाता है। इस प्रकार वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय सूचनाओं के अन्तर्सम्बन्धों को स्पष्ट करता है।
#वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की क्या-क्या विशेषताएँ हैं?
उत्तर: वित्तीय विश्लेषणों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
(1) वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय आँकड़ों का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण होता है।
(2) वित्तीय विश्लेषण जटिल अंकों को सरल व स्पष्ट रूप में व्यक्त करने की एक कला है।
(3) वित्तीय विश्लेषण वित्तीय मदों में परिवर्तन को स्पष्ट करता है।
(4) वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय मदों को स्पष्ट वर्गों में विभाजित करता है।
(5) वित्तीय विश्लेषण करने की अनेक विधियाँ हैं।
(6) वित्तीय विवरण विश्लेषण वित्तीय समंकों को उपयोगी सूचनाओं में परिवर्तित करता है।
#वित्तीय विश्लेषण के क्या उद्देश्य हैं?
उत्तर: वित्तीय विश्लेषण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. व्यवसाय की अर्जन क्षमता का ज्ञान- वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि विनियोजित की गई पूँजी पर उचित लाभ हो रहा है या नहीं।
2. शोधन क्षमता का पता लगाना- वित्तीय विश्लेषण से यह जानकारी मिल जाती है कि व्यवसाय द्वारा लिये गये अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन ऋणों को चुकाने की स्थिति क्या है ? धन की उपलब्धता का पता लगाने के लिये ही तरलता अनुपात ज्ञात किया जाता है।
3. वित्तीय सुदृढ़ता 'की जानकारी- वित्तीय विश्लेषण इस बात की जानकारी प्रदान करता है कि व्यवसाय के विकास के लिये धन की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है ? व्यवसाय की ख्याति के अनुरूप धन प्राप्त किया जा सकता है या नहीं।
4. उपलब्धियों का तुलनात्मक अध्ययन- व्यवसाय द्वारा जिन आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति की जा चुकी है, उसकी तुलना अन्य फर्मों से की जाना चाहिये। इसके अतिरिक्त चालू वर्ष की उपलब्धियों की तुलना पिछले वर्ष से की जाना चाहिये। यह कार्य वित्तीय विश्लेषण से ही सम्भव है।
5. बजट बनाने में सहायक- वित्तीय विश्लेषण के माध्यम से वित्तीय तथ्यों को स्पष्ट किया जाता है। इन तथ्यों की सहायता से पूर्वानुमान के आधार पर भविष्य की योजनाएँ बनायी जा सकती हैं।
#वित्तीय विवरण के विश्लेषण के लिये प्रयोग किये जाने वाली विभिन्न तकनीक, उपकरण या साधन कौन-कौनसे है?
उत्तर: इनके विश्लेषण के लिये प्रयोग किये जाने वाली विभिन्न तकनीक, उपकरण या साधन निम्नलिखित हैं-
(1) तुलनात्मक विवरण (Comparative Statements)
(2) समान आकार के विवरण (Common Size Statements)
(3) लेखांकन अनुपात (Accounting Ratio)
(4) प्रतिशत प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis Percentage)
(5) रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statements) (6) कोष प्रवाह विवरण (Funds Flow Statements)
(7) सम विच्छेद बिन्दु विश्लेषण ( Break Even Point Analysis)
1. तुलनात्मक विवरण
(Comparative Statements)
तुलनात्मक वित्तीय विवरण से आशय व्यवसाय के चालू वर्ष के वित्तीय विवरण की पिछले वर्षों के वित्तीय विवरणों से या दूसरी अन्य फर्म या व्यावसायिक इकाई के वित्तीय विवरणों से तुलना करके कमियों का पता लगाना है, ताकि इन्हें दूर किया जा सके। प्रायः इस प्रकार के विवरण में दो अवधियों की मदों तथा उनके आँकड़ों को इस प्रकार से प्रस्तुत किया जाता है कि उनमें हुए परिवर्तनों का सरलता से अध्ययन किया जा सके। तुलनात्मक विवरण में दो या अधिक वर्षों के आँकड़ों की तुलना की जाती है तथा देखा जाता है कि उनमें किस प्रकार का परिवर्तन हुआ है। यह परिवर्तन धनात्मक भी हो सकता या ऋणात्मक भी। वित्तीय विवरणों के तुलनात्मक अध्ययन के लिये यह आवश्यक है कि संस्था में लेखांकन सिद्धान्तों को अपनाने में एकरूपता हो तथा सभी वित्तीय विवरणों को प्राप्त करने व प्रस्तुत करने की विधि एक समान हो, अन्यथा निष्कर्ष भ्रामक हो सकते हैं।
2. समान आकार (Common Size) के विवरण
यह ऐसे विवरण हैं, जिनमें वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों को एक समान आधार (Common Base) पर प्रतिशत के रूप में परिवर्तित किया जाता है। विवरण की प्रत्येक मद को उससे सम्बन्धित कुल राशि के प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है। प्रत्येक मद का प्रतिशत उसके कुल योग से सम्बन्ध को प्रदर्शित करता है। समान आकार के विवरण स्थिति विवरण एवं आय विवरण दोनों के लिये
3. लेखांकन अनुपात (Accounting Ratios)
अनुपात के द्वारा एक संख्या को दूसरी संख्या की तुलना में प्रकट किया जाता है। इससे दो भिन्न संख्याओं में आपस में सम्बन्ध स्पष्ट हो जाता है। जब वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों के समूह का आप में सम्बन्ध स्पष्ट किया जाता है तो यह अनुपात विश्लेषण कहलाता है। अनुपात द्वारा जटिल एवं विस्तृत आँकड़ों को सरलतम रूप में प्रकट कर उन्हें आसानी से समझने योग्य बनाया जाता है।
4. रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statements)
रोकड़ प्रवाह विवरण विभिन्न साधनों से प्राप्त तथा उपयोग में लाई गई रोकड़ का एक विवरण होता है, जो व्यवसाय में उपलब्ध रोकड़ का ज्ञान कराता है। रोकड़ प्रवाह विवरण, वित्तीय विवरण का उपयोग करने वालों के लिये सूचना का कार्य करता है। इस प्रकार रोकड़ प्रवाह विवरण एक उपकरण है, जिससे व्यवसाय की तरलता एवं शोधन क्षमता का ज्ञान होता है।
5. कोष प्रवाह विवरण
(Funds Flow Statements) |
कोष प्रवाह विवरण भी वित्तीय स्थिति में परिवर्तन का एक विवरण है। कोष प्रवाह विवरण व्यवसाय की वित्तीय एवं विनियोग (Investments) सम्बन्धी क्रियाओं के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है। वास्तव में यह विवरण अतिरिक्त सूचना प्रदान करने का एक साधन है, क्योंकि वित्तीय विवरण केवल परिणाम को दर्शाते हैं, जबकि वित्तीय स्थिति में परिवर्तन के विवरण अतिरिक्त सूचनाएँ उपलब्ध कराते हैं, जिससे व्यवसाय की भावी योजना बनाने में सरलता होती है। कोष प्रवाह विवरण वर्ष के दौरान कार्यशील पूँजी में हुए परिवर्तनों को दर्शाता है। इस प्रकार कोष प्रवाह विवरण उन साधनों को बताता है, जहाँ से कोष प्राप्त किये गये हो तथा इन कोषों का प्रयोग कहाँ किया गया है।
6. प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis)
यह वित्तीय विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करने की एक सरल एवं महत्वपूर्ण पद्धति है। विभिन्न वर्षों के वित्तीय विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिये इनमें से किसी एक वर्ष के विवरण को आधार मानकर प्रत्येक मद को 100 मान लिया जाता है। इस आधार पर विभिन्न वर्षों की मर्दों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है। यह प्रतिशत सम्बन्धित मद के परिवर्तन की दिशा बताता है अर्थात् कमी या वृद्धि को प्रदर्शित करता है।
7. सम विच्छेद बिन्दु विश्लेषण (Break Even Point Analysis)
किसी उद्योग में सम-विच्छेद बिन्दु वह बिन्दु होता है, जहाँ कुल लागत कुल विक्रय के बराबर होती है। अर्थात् विक्रय के द्वारा सम्पूर्ण लागत वसूल हो जाती है। इस बिन्दु पर व्यवसाय को न लाभ होता है, होनि। यदि व्यवसाय को अतिरिक्त आय प्राप्त करना हो तो उसे विक्रय में वृद्धि करना होगी।
वित्तीय विवरणों के विश्लेषण में किस उपकरण या साधन को प्रयोग में लाया जाय, यह विश्लेषण के उद्देश्य या परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
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