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Tuesday, July 12, 2022

साझेदारी फर्म के पुनर्गठन से क्या आशय है? Meaning of Reconstitution of Partnership firm.

साझेदारी फर्म के पुनर्गठन से क्या आशय है? साझेदारीफर्म के पुनर्गठन की दशाए | Meaning of Reconstitution of Partnership firm.



साझेदारी फर्म के पुनर्गठन से आशय (Meaning of Reconstitution of Partnership Firm) 

साझेदारी फर्म में विद्यमान साझेदारों के लाभ विभाजन अनुपात में परिवर्तन, नये साझेदार का प्रवेश अथवा किसी साझेदार का निवृत्ति या अवकाश ग्रहण अथवा अन्य किसी परिस्तिथि में विद्यमान साझेदारी फर्म के समझौते में परिवर्तन ही साझेदारी का पुनर्गठन है। उल्लेखनीय है कि पुनर्गठन के फलस्वरूप साझेदारों के बीच जारी वर्तमान समझौता समाप्त हो जाता है और उसके स्थान पर नया समझौता लागू हो जाता है।

 साझेदारीफर्म के पुनर्गठन की दशाएँ

एक साझेदारी व्यवसाय का पुनर्गठन सामान्यतः निम्न दशाओं में हो सकता है:


1. साझेदारों के लाभानुपात में परिवर्तन (Change in Profit sharing Ratio of Partners) विद्यमान सभी साझेदारों की सहमति से उनके लाभानुपात में परिवर्तन के लिये साझेदारी समझौते में परिवर्तन किया जाता है। उदाहरण के लिये, 'अ' 'ब' तथा 'स' 3 : 2:1 के अनुपात में लाभ विभाजन करते हुए साझेदार हैं। इन्होंने निश्चय किया कि वे भविष्य में बराबर-बराबर अर्थात् 1: 1: 1 के अनुपात में लाभ बाँटेंगे। यह फर्म का पुनर्गठन कहलाएगा।


2. नये साझेदार का फर्म में प्रवेश (Admission of a new Partner in a Firm )- विद्यमान फर्म में जब किसी नये साझेदार को प्रवेश दिया जाता है, तो इससे वर्तमान साझेदारों के मध्य सम्बन्ध में परिवर्तन हो जाता है। यह परिवर्तन साझेदारी फर्म का पुनर्गठन कहलाता है। उदाहरण के लिये, 'अ' तथा 'ब' 3 : 1 के अनुपात में लाभ विभाजन करते हैं, इन्होंने निश्चय किया कि 'स' को लाभ में 1/4 भाग देकर नया साझेदार बनाया जाए। यह फर्म का पुनर्गठन कहलायेगा।


3. साझेदार की निवृत्ति या अवकाश ग्रहण (Retirement of a Partner)- किसी साझेदार की निवृत्ति या अवकाश ग्रहण करने पर भी फर्म का पुनर्गठन हो जाता है। उदाहरण के लिये, अ, ब तथा स एक फर्म में 5 : 2:1 के अनुपात में लाभ विभाजन करते हुए साझेदार हैं। 'स' फर्म से अवकाश ग्रहण कर लेता है। इस प्रकार अ तथा ब का भविष्य में लाभ विभाजन 3 : 2 होगा। यह फर्म का पुनर्गठन कहलायेगा। .


4. साझेदार की मृत्यु (Death of a partner) - फर्म के किसी साझेदार की मृत्यु हो जाने पर शेष साझेदारों के आपसी लाभानुपात में परिवर्तन हो जाता है। उदाहरण के लिये, 'क' 'ख' एवं 'ग' फर्म में 3 : 2:1 के अनुपात में साझेदार हैं। किसी कारणवश 'ख' की मृत्यु हो जाती है। इस कारण 'क' तथा 'ग' का लाभालाभ अनुपात 3 : 1 हो जायेगा। इससे फर्म का पुनर्गठन हो जाता है।


5. दो फर्मों का एकीकरण (Amalgamation of Two firms)- कभी-कभी प्रतियोगिता समाप्त करने के लिए दो फर्मों का एकीकरण या संविलयन कर दिया जाता है। इससे दोनों फर्मों के आपसी सम्बन्धों । में परिवर्तन हो जाता है तथा एक नया समझौता कर लिया जाता है। उदाहरण के लिये अ तथा ब 2: 1 के • अनुपात में लाभ विभाजन करते हुए साझेदार हैं। इन्होंने एक अन्य फर्म जिसके 'स' तथा 'द' साझेदार हैं, जो । 3 : 1 के अनुपात में लाभ विभाजन करते हैं, संविलयन करने का निश्चय किया। इस निर्णय के पूर्व उन्होंने अपना लाभ विभाजन का अनुपात स तथा 'द' के साथ मिलकर 4 : 3 : 2 : 1 निश्चय किया। इस प्रकार • दोनों फर्मों के पुराने लाभानुपात में परिवर्तन हुआ तथा एक नई पुनर्गठित फर्म का निर्माण हुआ। 


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