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Wednesday, March 2, 2022

इकहरा लेखा प्रणाली (Single Entry System of Accounting) का अर्थ | विशेषता | महत्त्व।

इकहरा लेखा प्रणाली (Single Entry System of Accounting) का अर्थ | विशेषता | महत्त्व। 

इकहरा लेखा प्रणाली का अर्थ (Meaning of Single Entry System of Accounting)

इकहरा लेखा प्रणाली


बहीखाता रखने की वह प्रणाली जिसमें दोहरा लेखा प्रणाली के सिद्धान्तों का पूर्णतः पालन नहीं किया जाता है, उसे इकहरा लेखा प्रणाली कहते हैं। इस प्रणाली में किसी व्यवहार का लेखा सामान्यतः एक ही पक्ष में होता है, अतः इसे अपूर्ण लेखा प्रणाली और एकांगी प्रविष्टि प्रणाली भी कहते हैं। 

इकहरा लेखा प्रणाली की परिभाषा

जे.आर. बॉटलीबॉय के अनुसार, "इकहरा लेखा प्रणाली बहीखाता की वह प्रणाली है। जिसमें देनदार तथा लेनदार के केवल व्यक्तिगत खाते रखे जाते हैं।" इसे निम्नानुसार भी परिभाषित किया जा सकता है

"इकहरा लेखा प्रणाली बहीखाते की वह प्रणाली है, जिसमें कुछ सौदों के दोनों पहलुओं का लेखा किया जाता है, जबकि कुछ सौदों के केवल एक पहलू का तथा कुछ सौदों का लेखा नहीं किया जाता है। प्रायः इस प्रणाली में व्यक्तिगत एवं रोकड़ से सम्बन्धित व्यवहारों का ही लेखा किया जाता है।"

इकहरा लेखा प्रणाली की विशेषताएँ।
(Characteristics of Single Entry System) 

1. सीमित क्षेत्र- इस प्रणाली को केवल छोटे व्यवसायी ही अपनाते हैं। कानूनी बाध्यता होने से कम्पनी संगठनों द्वारा इस प्रणाली को नहीं अपनाया जा सकता है। 

2. अपूर्ण लेखा- इस प्रणाली में व्यवहारों का अपूर्ण लेखा रखा जाता है।

3. रोकड़ एवं व्यक्तिगत व्यवहारों का लेखा- इस प्रणाली में रोकड़ एवं व्यक्तियों तथा संस्थानों से सम्बन्धित व्यवहारों का ही लेखा रखा जाता है। नाममात्र (Nominal) एवं वास्तविक खाते को महत्व नहीं दिया जाता है।

4. मूल-अभिलेख आवश्यक- इसमें कुछ व्यवहारों का लेखा नहीं होने से सूचना एवं जानकारी के लिये मूल-अभिलेख या प्रमाणकों को सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। 

5. सहायक बहियाँ रखना- इस प्रणाली में दोहरा लेखा प्रणाली की तरह सहायक बहियाँ रखी जा सकती हैं, परन्तु उनमें खतौनी केवल व्यक्तिगत खातों की तरह की जाती है।

6. छोटे व्यवसाय के लिये उपयोगी यह प्रणाली छोटे जैसे- किराना व्यापारी, कविता, एकाकी व्यापार आदि के लिये उपयोगी है। 

7. सम्पत्तियों के खाते नहीं खोलना इस प्रणाली में सम्पत्तियों से सम्बन्धित खाते नहीं रखे जाते हैं। इकहरा


इकहरा लेखा प्रणाली के लाभ या उपयोग (Advantages or utility of Single Entry System) 

1. सरल एवं सुविधाजनक- यह प्रणाली सरल एवं सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें दोहरा लेखा प्रणाली की तरह सौदों के दोनों पहलुओं का लेखा नहीं करना पड़ता है। 

2. मितव्ययी- यह प्रणाली कम खर्चीली है, क्योंकि इसमें अपेक्षाकृत कम पुस्तकें रखी जाती है तथा लेखाकार की नियुक्ति आवश्यक नहीं होती है।

3. छोटे व्यवसायों के लिये उपयोगी - प्रायः इस प्रणाली को छोटे व्यवसायी एवं फर्म के द्वारा अपनाया जाता है, जहाँ कम एवं नकद व्यवहार ही होते हैं। 

4. व्यावहारिक- यह प्रणाली छोटे स्तर के व्यवसाय के लिये व्यावहारिक है, क्योंकि इसके द्वारा लाभ-हानि ज्ञात कर अपने उद्देश्यों की पूर्ति आसानी से कर ली जाती है।

5. कम आय प्रकट करना- अपूर्ण लेखों के रखने से कई सौदों या व्यवहारों से प्राप्त आय को लिया जाता है एवं लाभ कम दर्शाने से आयकर आदि से बचा जा सकता है। 6. समय एवं श्रम की बचत प्रायः इसमें अपेक्षाकृत लेखा कार्य कम किया जाता है, जिससे समय एवं श्रम की बचत हो जाती है।

7. प्रशिक्षित व्यक्ति की आवश्यकता नहीं- इस प्रणाली में दोहरा लेखा प्रणाली की तरह जटिल नियम एवं सिद्धान्त नहीं होते हैं। केवल कुछ ही खातों को खोलकर काम चला लिया जाता है। अतः इसमें प्रशिक्षित लेखाकार की आवश्यकता नहीं होती है।

8. व्यवसायी को लाभ- अपूर्ण लेखा प्रणाली में कई ऐसे तथ्यों को छुपा लिया जाता है, जिनके प्रकट होने से व्यवसायी के ऊपर व्यय भार बढ़ जाता है। इससे व्यवसायी कई प्रकार के करों या व्ययों को। बुकाने से बच जाता है।

इकहरा लेखा प्रणाली के दोष या सीमाएँ (Disadvantages or Limitations of Single Entry System)

इकहरा लेखा प्रणाली को अवैज्ञानिक एवं अविश्वसनीय माना गया है, इसी कारण वर्तमान में इस प्रणाली का प्रयोग कम किया जाने लगा है। इसके प्रमुख दोष या सीमाएँ निम्नानुसार हैं 
1. सीमित क्षेत्र- इस प्रणाली को केवल छोटे स्तर के व्यापारी एवं फर्मों के द्वारा ही अपनाया जाता है। बड़े स्तर के व्यवसाय एवं कम्पनी संगठन के लिये यह प्रणाली उपयोगी नहीं है। 

2. गणितीय शुद्धता का अभाव- इस प्रणाली के अनुसार तलपट नहीं बनाया जा सकता, अतः गणितीय अशुद्धि रहने की संभावना बनी रहती है।

3. अवैज्ञानिक- यह प्रणाली किन्हीं निश्चित नियमों एवं सिद्धान्तों पर आधारित नहीं है। 

4. अविश्वसनीय इस प्रणाली में कई तथ्यों को छुपा लिया जाता है। इससे इसके उपयोगकर्ता प्रकट की गई सूचनाओं पर विश्वास नहीं करते हैं। 

5. सही आर्थिक परिणामों का अभाव- इस प्रणाली के अनुसार केवल रोकड़ एवं व्यक्तिगत खातों को रखा जाता है। नाममात्र एवं वास्तविक खातों के अभाव में लाभ-हानि खाता तथा शुद्ध स्थिति विवरण नहीं बनाया जा सकता।

6. अशुद्धियों का सुधार न होना- दोहरा लेखा प्रणाली की भाँति इसमें अशुद्धियों के सुधार का कोई प्रावधान नहीं है। 

7. तुलनात्मक अध्ययन संभव नहीं- लेखों के अपूर्ण होने से पिछले वर्षों के वित्तीय परिणामों से तुलना करने में कठिनाई होती है।

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