MPTET EXAMS | Samvida varg 3 | Child development | बाल विकास
बाल विकास (Child development)
बाल मनोविज्ञान का सर्वप्रथम अध्ययन जॉन लाक (सीधा अध्ययन) ने किया था ।
बाल मनोविज्ञान को सर्वप्रथम परिभाषित बर्क (अमेरिकन मनोवैज्ञानिक ) ने किया था।
पेस्टालॉजी
* बाल ने मनोविज्ञान का सबसे पहले वैज्ञानिक अध्ययन किया |
*1.5 वर्ष के बालक पर ( व्यवहार का ) अध्ययन किया।
* इन्होंने बालक के अध्ययन पर पुस्तक Baby biography लिखी।
बाल मनोविज्ञान के जनक
स्टेनले हॉल - इन्होंने सबसे पहले प्रश्नावली का निर्माण किया इनको बाल मनोविज्ञान का जनक कहा जाता है।
बाल मनोविज्ञान की परिभाषा
0-18 वर्ष (गर्भावस्था से किशोरावस्था) तक के बालकों का अध्ययन जिस शाखा में किया जाता है उसे बाल मनोविज्ञान कहते हैं।
क्रो एण्ड को के अनुसार "१०वीं शताब्दी का काल बालकों का काल है"।
विश्व का पहला बाल सुधार गृह न्यूयार्क (USA) (1887)
एण्डरसन के अनुसार “ विकास का अर्थ मात्र किसी व्यक्ति की ऊँचाई या योग्यता में कुछ वृद्धि से नहीं है। इसके स्थान पर विकास अनेक संरचनाओं और प्रकार्यों के समन्ना की एक जटिल प्रक्रिया है।"
हरलॉक के अनुसार विकास का अर्थ गुणात्मक परिवर्तनों से है विकास की परिभाषा क्रमिक, सम्बन्धतापूर्ण, परिवर्तनों की प्रगतिपूर्ण श्रृंखला के रूप में दी जा सकती है
विकास की विशेषतायें,
* विकास प्रगतिपूर्ण श्रृंखला के रूप में घटित होता है। *विकास में कमिक परिवर्तन पाये जाते है।
*परिवर्तनो में निरन्तरता पाई जाती है।
* यह परिवर्तन अविराम गति से चलते हैं।
* विकास किसी भी अवस्था में सामान्य नहीं होता है।
*क्रमिक परिवर्तन एक दूसरे के साथ किसी न किसी रूप से सम्बन्धित रहते हैं। यह परिवर्तन एक दुसरे से अलग न होकर जुड़े रहते हैं।
* विकास परिवर्तनों की गति भिन्न अवस्थाओं में भिन्न-2 होती है।
विकास के स्वरूप
आकार में परिवर्तन- यह परिवर्तन विशेष रूप से शारीरिक वृद्धि में दिखाई देते है जैसे बालक बड़ा होता जाता है उसकी ऊं. भार, मोटाई में अंतर आ जाता है। मानसिक विकास के अन्तर्गत शब्द भंडार तर्क और स्मरण शक्ति में क्रमश: विकास दिखाई देता है
अनुपात में परिवर्तन-बालक के सभी शारीरिक अंग समान रूप से नहीं बढ़ते अन्य अंगों के अनुपात में नवजात शिशु का सिर अनुपात में बड़ा होता है किंतु जैसे जैसे शिशु वढता है उसका सिर सम्पूर्ण शरीर के अनुपात में अपेक्षाकृत कम बढ़ता है। है| पुराना विशेषताओं का लोप पुराने अंग लुप्त होना प्रारम्भ हो जाता है।
नई विशेषताओं की प्राप्ति - पुरानी विशेषताओं के समाप्त होने के साथ- साथ नई शारीरिक, मानसिक विशेषताओं की प्राप्ति होती है। ६५० - स्थायी दांत मानसिक विकास - यौन सम्बन्धित ज्ञान की जिज्ञासा, नैतिकता, धार्मिकता आदि ।
विकास के सिद्धांत - व्यक्तिगत विभिन्नता का सिद्धांत - प्रत्येक बालक का शारीरिक एवं मानसिक विकास व्यक्तिगत रूप से भिन्न होता है। इसलिए समान आयु के बालक बालिकाओं में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास में भिन्नता दिखाई देती है।
अंतर समान प्रतिमान का सिद्धांत - प्राणी जगत में प्रत्येक जाति के विकास का एक निश्चित नियम होता है
हरलॉक के अनुसार " प्रत्येक प्रजाति वह चाहे मनुष्य जाति हो या पशु जाति हो अपनी प्रजाति के अनुरूप विकास का अनुसरण करते हैं।"
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