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Tuesday, February 15, 2022

खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही क्या है ? What is Petty cash Book

खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही क्या है?  What is Petty cash Book n hindi ?

खुदरा रोकड़ / लघु रोकड़ बही का आशय 
लघु रोकड़ बही व्यापार के नकद व्ययों को लिखने की वह  बही है, जिसमें प्रतिदिन के छोटे-छोटे फुटकर व्ययों का लेखा किया जाता है। इसे खुदरा रोकड़ बही भी कहते हैं। 

खुदरा रोकड़ / लघु रोकड़ बही की परिभाषा

पिकिल्स के अनुसार, "बड़े-बड़े व्यापार गृहों में अनेक ऐसे छोटे-छोटे व्यय होते हैं, जिनका पुगतान रोकड़ में किया जाता है। यदि वे सब व्यय विस्तृत रूप में रोकड़ बही में लिखे जायें तो बहुत सा बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। समय की बचत के लिए पृथक से एक रोकड़ बही रखी जाती है और उसमें बुझा व्ययों का लेखा किया जाता है। इसे लघु या खुदरा रोकड़ बही कहा जाता है।"


खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही की आवश्यकता (Necessity of Petty Cash Book)

प्राय: प्रत्येक बड़े व्यापारी के यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-छोटे खर्चे होते रहते हैं, जैसे- मजदूरी, डाक खर्च, ताँगा भाड़ा, ढुलाई, लेखन-सामग्री, चाय-पान व्यय आदि। इनमें से कई खर्च दिन में अनेक बार होते हैं। इस प्रकार के छोटे-छोटे खर्चों का लेखा करना रोकड़िये (Cashier) के लिए बड़ा ही दुविधाजनक होता है। उसको अनेक लेखे करने पड़ते हैं, जिससे उसका काम बढ़ जाता है। अधिक कार्य-भार के कारण भूल होने का भी डर रहता है। वह बड़े-बड़े लेन-देनों की ओर पूरा ध्यान भी नहीं दे पाता है। अतएव इन कठिनाइयों से मुक्ति के लिए व्यापारिक संस्थाओं में जहाँ फुटकर और छोटे-छोटे खर्च अधिक संख्या में होते है, एक पृथक बहीं की आवश्यकता उत्पन्न हुई। इसी पृथक बही को लघु रोकड़ बही कहते हैं। लघु रोकड़ नही को फुटकर रोकड़ बही और खुदरा रोकड़ बही भी कहा जाता है। 

लघु रोकड़ बही लिखने का दायित्व एक अन्य कर्मचारी को सौंप दिया जाता है। इसे लघु रोकड़िया (Petty Cashier) कहते हैं।

लघु रोकड़ बही के लाभ (Advantages of Petty Cash Book) 

लघु रोकड़ बही से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ निम्नानुसार हैं-

(1) लघु रोकड़ बही में व्यापार के फुटकर व्ययों का उचित और पूरा लेखा रहता है। 

(2) इसमें छोटे-छोटे व्ययों का पूर्ण विवरण एक ही स्थान पर मिल जाता है। 

(3) लघु रोकड़ बही रखने से श्रम विभाजन हो जाता है, जिससे सरलता एवं शीघ्रता से हिसाब रखा जा सकता है। (4) लघु रोकड़ बही रखने पर छोटे-छोटे व्ययों की प्रविष्टि तुरन्त कर | जाती है, जिसके कारण उनके भूलने की संभावना कम हो जाती है। 

(5) लघु रोकड़ पुस्तक बनाये जाने पर खतौनी करने में सुविधा रहती हैं।

(6) प्रमुख रोकड़िया के समय एवं श्रम की बचत होती है, क्योंकि वह फुटकर व्ययों के लेखे से मुक्त हो जाता है। 

(7) फुटकर व्ययों का ज्ञान रहने से अनावश्यक फुटकर व्ययों को नियंत्रित किया जा सकता है। 

(8) लघु रोकड़ बही लिखने का कार्य एक साधारण लिपिक सरलता से कर सकता है।

(9) लघु रोकड़ बही की जाँच समय-समय पर प्रमुख रोकड़िया द्वारा की जाती है, इससे हिसाब में हेराफेरी अथवा जालसाजी की संभावना कम रहती है।

लघु रोकड़ बही की अग्रदाय पद्धति (Imprest System of Petty Cash Book)


अग्रदाय पद्धति के अनुसार प्रत्येक माह के प्रारंभ में लघु रोकड़िया को एक माह के संभावित का खर्च के लिए पर्याप्त रकम दे दी जाती है। इस अग्रिम प्राप्त रकम से लघु रोकड़िया माह के फुटकर व्या भुगतान करता रहता है। फुटकर व्ययों की रकम को वह लघु रोकड़ पुस्तक से सम्बन्धित स्तम्भों में जमा कर है। लघु रोकड़िया जब भुगतान करता है तो वह उन भुगतानों की रसीदें या प्रमाणक ले लेता है।

माह के अन्त में फुटकर रोकड़ पुस्तक और भुगतान के प्रमाणकों का निरीक्षण प्रधान रोकड़िया द्वारा किया जाता है। जाँच करने के पश्चात् वह फुटकर व्ययों में जितनी रकम खर्च हो गयी है उतनी रकम रोकड़िया को वापिस लौटा देता है और सम्बन्धित आय-व्यय खातों में उनका लेखा कर लेता है। इस प्रजन रकम माह समाप्त होने के पूर्व ही खर्च प्रति माह यह क्रम चला करता है। जिससे हर माह के प्रारम्भ में लघु रोकड़िया के पास अग्रिम रकम उतनी हो हो जाती है, जितनी कि उसके पास प्रारम्भ में थी। यदि अग्रिम दी हो जाती है तो फुटकर रोकड़ बही का उसी समय निरीक्षण कर खर्च की गई रकम लघु रोकड़िया को देक जाती है। लघु रोकड़ बही की इस पद्धति को अग्रदाय पद्धति कहते हैं।


अग्रदाय पद्धति की विशेषताएँ (Characteristics of Imprest Systern)


लघु रोकड़ बही की अग्रदाय पद्धति में निम्न विशेषताएँ होती हैं-

(1) लघु रोकड़िये को प्रारम्भ में एक-दो सप्ताह के फुटकर खर्च के लिए पर्याप्त रकम दी जाती है।

(2) लघु रोकड़ के लिए आगे रकम तब ही दी जाती है, जबकि पूर्व भुगतानों का ठीक-ठीक हिसाब दे दिया गया हो। 

(3) आगे दी जाने वाली रकम प्रारम्भ में दी गयी रकम से अधिक नहीं हो सकती।

(4) समस्त फुटकर भुगतानों की रसीद आवश्यक होती है। (5) लघु रोकड़ में अधिकतम भुगतान की राशि निश्चित रहती है।

(6) लघु रोकड़िये को फुटकर खर्च के लिए प्रधान रोकड़िये से ही राशि प्राप्त होती है। फुटका प्राप्ति लघु रोकड़िये को नहीं दी जाती है।


 

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