मूल्यांकन की परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि। मौखिक परीक्षा |लिखित परीक्षा |संविदा वर्ग 3 महत्वपूर्ण विषय ।
परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि का आशय।
ज्ञान पक्ष से सम्बन्ध
इस मूल्यांकन का सम्बन्ध ज्ञान पक्ष से है। यह मूल्यांकन दो प्रकार से किया जाता है:-
1. मौखिक परीक्षाएं
2. लिखित परीक्षाएं
1. मौखिक परीक्षाएं - मौखिक रूप से पूछकर बालकों के प्रत्यास्मरण, चिंतन, तुरंत अभिव्यक्ति,क्रियाशीलता, विश्लेषण, पढ़ने की योग्यता एवं उच्चारण की कुशलता आदि की जांच की जाती है। पूर्व प्राथमि स्तर पर बच्चों का मूल्यांकन इसी आधार पर किया जाता है। माध्यमिक स्तर पर कुछ विषयों में २०% अंकों की मौखिक परीक्षा ली जाती है। उच्च तथा उच्चतर स्तरों पर भी मौखिक परीक्षाओं को स्थान दिया गया है। मौखिक परीक्षायें विभिन्न प्रकार से ली जाती है। मौखिक इकाई परीक्षा, उच्चारण परीक्षा श्रवण योग्यता परीक्षण, भाषण योग्यता, भौखिक रूप से प्रश्न पूछकर आदि
लिखित परीक्षाएं. - वर्तमान शिक्षण पद्धति में छात्रों के मूल्यांकन हेतु सन 1904 में सर्वप्रथम ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में लिखित परीक्षा की गई ।
दो प्रकार की होती हैं.
1. वस्तुनिष्ठ परीक्षाएं।
2. निबन्धात्मक परीक्षाएं।
वस्तुनिष्ठ परीक्षाए -ये परीक्षायें क्रमशः स्कांतर बहु निर्वाचन, तुल्य या रिक्त स्थान पूर्ति के प्रश्नों पर आधानि होती है। इसमें सही उत्तरों को कुँजी के द्वारा अंकित किया जाग । यदि कोई उत्तर कुंजी के विपरीत है तो उसे गलत मापा जाता है। इसके अंतर्गत बालकों के विषय सम्बंधी ज्ञान की उपलब्धि, धौग्यता, अभिरूचि और बुद्धि आदि की यांच की जाती है।
निबंधात्मक परीक्षाएं - यह परम्परागत परीक्षा प्रणाली की विधि है. इसके अंतर्गत सभी बालूक पाठ्यक्रम के सभी कई प्रश्नों के उत्तर निश्चित समय के अंदर निबंध के रूप में देते है। जिससे परीक्षक बालको के विचार तुलना, तर्क, आलोचना आदि शक्तियों के साथ-2 विचारों को संगठित करने की योग्यता, भाषा व शैली आदि की जांच सरलता से कर सकता है। निबंधात्मक • परीक्षाओं को ज्ञानात्मक वा भावनात्मक पक्षों के अधिगम के मापन के लिए प्रयोग किया जा सकता है यह दांतों के विश्लेषण तथा मूल्यांकन क्षमताओं के मापन के लिए होती है। प्रत्यास्मरण उत्तर देता है। इसमें छात्र अपनी स्मरण शक्ति के आधार पर सामान्य प्रत्यास्मरण - इसमें सामान्यतः कब क्या, कौन, कहां व किसका से सम्बन्धित सूचनामा पूरक प्रश्न किये जाते है। जिनका एक ही विशिष्ट उत्तर होता है जो स्मरण शक्ति के आधार पर दिया जाता है।
उदहारण: प्र1. भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ?
डा० राजेन्द्र प्रसाद |
प्र2. विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है?
उत्तर: 5 जून
विशेषता: इसमें अनुमान से सही करने की सम्भावना
बिल्कुल नहीं होती
*इनकी रचना करना तथा अंकन करना सरल होता है।
* एक प्रश्न से एक उत्तर का ही मापन किया जाता है। ऐसे 10% प्रश्न ही परीक्षा में सम्मिलित किये जाने चाहिए
इन प्रश्नों को अपूर्ण कथनों में लिय जाता है। और छात्र अपनी स्मरण रिक्त स्थान पूर्ति क्षमता का प्रयोग करते हुए कथा पूर्ण करता है। रिक्त स्थान के लिए एक ही सही शब्द होता है। विशेषता इसमें अनुमान से सही उत्तर नहीं दिया जा सकता है।
* इनकी रचना तथा अंकन करना सरल होता है। इसमें प्रत्यास्मरण का अभ्यास होता है।
* इनका प्रयोग ज्ञान उद्देश्य के मापन के लिए होता है। के विद्यार्थियों को उत्तर देने की स्वतंत्रता होती है।
सुझाव -एक प्रक्ष में दो से अधिक रिक्त स्थाप नहीं दिये जाने चाहिए ।वाक्यो के प्रारंभ या अंत में रिक्त स्थान नहीं देने चाहिए । 10% प्रश्न ही परीक्षा में सम्मिलित किये जाने चाहिए
प्रत्याभिज्ञान - इसमें विद्यार्थी सही उत्तर को पहचानकर प्रश्न का समाधान करता है।
एकांतर अनुक्रिया - इसमें प्रथम एक कथन के रूप में दिया नहीं, सही गलत जाता है जिसकी जांच विद्यार्थी हा सत्य असत्य के रूप में करते हैं। विशेषता इनकी रचना करना सरल है। कम समय में अधिक प्रश्नों के उत्तर दिये जाते हैं। इनका अंकन करना अत्यंत सुविधाजनक है।
इन प्रश्नों के प्रयोग से परीक्षा की विश्वसनीयता तथ वैधता कम होती है।
सुझाव - ऐसे केवल 10% प्रश ही परीक्षा में सम्मिलित करना चाहिए। #तीसरा विकल्प अज्ञात ही होना चाहिए जिससे छात सही उत्तर दे सकें।
बहुनिर्वचन -इन प्रश्नों में एक कथन के लिए कई उत्तर दिये रहते हैं। इन विकल्पों में से छात को सबसे सही उत्तर का चयन करना होता है। इन प्रश्नों को ई. एफ. लिंडक्विस्ट ने उत्तम प्रकार का माना है। कानबेक एवं रॉस ने भी इसे सबसे उत्तम | प्रकार का माना है। विशेषतायें इसमें अनुमान से सही करने की सम्भावना कम होती है।
* इनका अंकन व विश्लेषण करना सरल होता है। तर्कपूर्ण चिंतन एवं सूझ की क्षमताओं की परीक्षण की जाती है।
* यह मापदण्ड उत्तम परीक्षा मानी जाती है। र सीमायें - सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकों में इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता इनकी रचना करना कठिन होता है।
* अनुमान से सही करने की सम्भावना रहती है।
सुझाव
* कम से कम 4 या अधिक से अधिक 6 विकल्पों का उपयोग करना चाहिए । * विकल्पों में समरूपता होनी चाहिए। * भाषा तथा व्याकरण आदि से सही विकल्प का बोध नहीं होना चाहिए।
*-निर्देश स्पष्ट रूप से दिये जाने चाहिए।
* एक परीक्षा में 50% से अधिक प्रश्न सम्मिलित नहीं करने
समानता रूप : इन प्रश्नों को दो स्तम्भों में लिखा जाता एक स्तम्भ में कुछ न दिये जाते हैं दूसरे में उनके उत्तर दिये जाते हैं परन्तु उन्हें क्रमबद्धन जाता विशेषता - छात्र को सही उत्तर का चयन करना होता है-
* ज्ञानात्मक उद्देश्यों के मापन के लिए अधिक उपयोगी होते हैं।
*इस प्रकार के प्रश्नों में अनुमान लगाना कठिन होता है।
* इन प्रश्नों को सूचना तथा ज्ञात उद्देश्ये के लिए ही प्रयोग किये जाते
* इसमें अनुमान लगाने का अवसर रहता है
* इनका अंकन तथा विश्लेषण कठिन होता स्तम्भों में समान खण्डों के होने पर अंतिम प्रश्न को उत्तर स्वतः ही मिल जाता है।
सुझाव -* दूसरे स्तम्भू में पहले स्तम्भ की अपेक्षा अधिक कथन होने चाहिए। 2 निर्देशों को स्पष्ट रूप से लिखना चाहि
वर्गीकरण. - इन अश्नों के अंतर्गत कुछ ऐसे शब्दों क समूह छांतों के सामने रखा जाता है। जिनमें से एक शब्द असंगत अथवा समूह के शब्दों भिन्न होता है।
विशेषतायें - इस प्रकार के प्रश्नों को बोध उद्देश्य तथा विभेदीकरण के क्षमताओं के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इनका उपयोग बुद्धि परीक्षण में ही किया जाता है।
सदृश्य अनुभव स्वरूप - इसमें दो समान परिस्थितयों को प्रस्तुत किया जाता है। पहली परिस्थिति पूर्ण तथा दूसरी परिस्थिति अपूर्ण होती है। पहली परिस्थिति के आधार पर समान सम्बन्ध स्थापित करते हुए दूसरी परिस्थिति उत्पन्न की जाती है।
उदहारण: मध्यप्रदेश : भोपाल :: उत्तर प्रदेश : लखनऊ
विशेषता - ★ इस प्रकार के प्रसों में सूक्ष्म तथा तार्किक क्षमताओं का मापन किया जाता है। *यह विश्लेषण के उद्देश्यों के मापन में प्रयोग किये जाते है।
*क्रियात्मक पक्ष से सम्बन्धिल प्रायोगिक परीक्षाएं
किसी भी विषय के व्यवहारिक ज्ञान का मूल्यांकन करने हेतु प्रायोगिक परीक्षाएं ली जाती है। Exp Physics practical.
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