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Thursday, September 1, 2022

साझेदार की निवृत्ति अथवा अवकाश ग्रहण का आशय, कारण और वैधानिक स्थिति।

साझेदार की निवृत्ति अथवा अवकाश ग्रहण का आशय, कारण और वैधानिक स्थिति। Meaning, causes and legal position of Retirement of Partner.

साझेदारी की निर्वृत्ति
साझेदारी की निर्वृत्ति

साझेदार की निवृत्ति का आशय (Meaning)


चालू साझेदारी व्यवसाय से साझेदार के पृथक होने को साझेदार की निवृत्ति अथवा उसका अवकाश ग्रहण करना कहते हैं। साझेदार की निवृत्ति साझेदारी का पुनर्गठन है, यदि शेष साझेदार उसी व्यवसाय को रखना चाहते हों। 


यदि साझेदारों ने अपने समझौते में अवकाश ग्रहण करने की स्थितियों को स्पष्ट कर रखा है, तो एक साझेदार शेष सब साझेदारों की सहमति से समझौते में किए गए स्पष्ट ठहराव के अनुसार अवकाश ग्रहण कर सकता है। ऐच्छिक साझेदारी की दशा में साझेदार फर्म को लिखित सूचना देकर फर्म से निवृत्त हो सकता है।


साझेदार की निवृत्ति के कारण (Causes of Retirement of Partner)

एक साझेदार को फर्म से अवकाश ग्रहण करने की आवश्यकता निम्न कारणों से हो सकती है-

(1) साझेदार की वृद्धावस्था, 

(2) साझेदार की अस्वस्थता तथा असमर्थता,

(3) परस्पर मतभेद हो जाना,

(4) अन्य व्यापार में जाने की इच्छा, 

(5) साझेदार की मानसिक रूप से विकृति,

(6) साझेदार का दिवालिया हो जाना, 

(7) साझेदारी फर्म लगातार हानि में चलना,

(8) स्वयं का कारोबार प्रारम्भ करना, 

(9) अन्य किसी कारण से, जिससे वह फर्म में रहना उचित न समझता हो ।


 निवृत्त साझेदार की वैधानिक स्थिति

(Legal Position of the Retiring Partner) 

(1) साझेदारी व्यापार का कोई भी साझेदार अन्य साझेदारों की सम्मति से अवकाश ग्रहण कर सकता है। इस सम्बन्ध में कोई समझौता हो, तो पृथक होने वाला साझेदार समझौते की शर्तों के अनुसार अवकाश ले सकता है। ऐच्छिक साझेदारी में जाने वाला साझेदार लिखित सूचना देकर साझेदारी से अवकाश ले सकता है।


(2) साझेदारी अधिनियम के अनुसार साझेदारी में किसी भी प्रकार का परिवर्तन अर्थात् नये साझेदार के प्रवेश, अवकाश ग्रहण अथवा मृत्यु होने पर साझेदारी का अन्त हो जाता है। साझेदारी का अन्त हो जाने पर यह आवश्यक नहीं है कि सार्थ का भी अंत हो जाय, परिवर्तित अवस्था में अर्थात् शेष साझेदार नई फर्म की स्थापना कर व्यवसाय कर सकते हैं। 


(3) अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार या मृत साझेदार के उत्तराधिकारी को अपने हिस्से की पूँजी, ख्याति और लाभ की रकम लेने का अधिकार होता है। शेष साझेदार उसे यह रकम दे देते हैं। 


(4) वैधानिक दृष्टि से अवकाश ग्रहण कर लेने पर भी एक साझेदार अपने कार्यकाल के दायित्व के लिए उत्तरदायी रहता है, लेकिन व्यवहार में अवकाश ग्रहण करने वाले साझेदार को उसके हिस्से की राशि देकर उसे दायित्व से मुक्त कर दिया जाता है। 


(5) यदि पूर्व संचित लाभ का संचय हो तो निवृत्त अथवा मृत साझेदार के उत्तराधिकारी को आनुपातिक भाग पाने का अधिकार होता है।

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