आय व्यय खाता किसे कहते है?(Income and Expenditure Account)| आय व्यय खाते की विशेषताएँ ।
आय व्यय खाते का अर्थ एवं आवश्यकता
(Meaning and Need)
इस को बनाने का उद्देश्य एक अवधि विशेष से सम्बन्धित आय-व्यय का परिणाम ज्ञात करना है। जिस प्रकार व्यापारिक संस्थाएं लाभ अथवा हानि जानने के लिए लाभ-हानि खाता बनाती है, उसी प्रकार लाभ न कमाने वाली या गैर-व्यापारिक संस्थाएँ तथा व्यावसायिक व्यक्ति अपना वार्षिक परिणाम जानने के लिए आय-व्यय खाता तैयार करते हैं। आय व्यय खाता एक नाममात्र का खाता है।
आय व्यय खाते की परिभाषा (Definitions)
1. श्री एन. एस. डावर के अनुसार, आय-व्यय खाता वास्तव में लाभ-हानि खाता है, किन्तु जैसे कि गैर-व्यापारिक संस्थाओं से लाभ अथवा हानि दशनि की अपेक्षा नहीं की जाती है, इसको आय-व्यय खाते की संज्ञा दी गई है।
2. श्री बॉटलीबॉय के अनुसार, यह एक आयगत खाता है, जो कि गैर-व्यापारिक संस्थाओं द्वारा बनाया जाता है जैसे कि शिक्षण संस्थाएं, अस्पताल आदि और एक निश्चित अवधि में अर्जित समस्त आय को सम्मिलित करता है।
आय-व्यय खाते की विशेषताएं
(Features of Income and Expenditure A/c)
या
आय-व्यय खाता बनाने की विधि
(Method of Preparing Income and Expenditure A/c)
आय-व्यय खाता बनाने की विधि लाभ-हानि खाते के समान ही है। अतः इस खाते के नाम पक्ष में समस्त व्यय और जमा पक्ष में समस्त आय लिखी जाती हैं। यह आय-व्यय उसी वर्ष से सम्बन्धित होना चाहिए, जिस वर्ष का आय-व्यय खाता तैयार करना है। यदि इस खाते के जमा पक्ष का योग नाम पक्ष से अधिक होता है, तो अन्तर आय का व्यय पर आधिक्य (Excess of Income over Expenditure) कहलाता है। इसके विपरीत नाम पक्ष का आधिक्य व्यय का आय पर आधिक्य (Excess of Expnditure over Income) कहलाता है। संक्षेप में, इन्हें क्रमशः बचत (Surplus) तथा घाटा (Deficiency) भी कहते हैं। यह खाता प्राप्ति भुगतान खाते के आधार पर बनाया जाता है। यह नाममात्र का खाता होता है।
आय-व्यय खाता बनाते समय निम्नलिखित बातें ध्यान में रखनी चाहिए:
(1) सर्वप्रथम संस्था का नाम, खाते का नाम (आय-व्यय खाता) एवं हिसाबी वर्ष का उल्लेख शीर्षक के रूप में करना चाहिए।
(2) प्राप्ति एवं भुगतान खाते में दिए गए प्रारंभिक और अंतिम रोकड़ शेष तथा बैंक शेष का लेखा नहीं करना चाहिए।
(3) इसमें समस्त व्यय नाम पक्ष में और आय जमा पक्ष में लिखी जाती है।
(4) एक अवधि विशेष से सम्बन्धित समस्त आय तथा व्यय, चाहे उनकी प्राप्ति या भुगतान न हुआ हो, इसमें लिखे जाते हैं।
(5) इसमें पूँजीगत व्यय तथा पूँजीगत प्राप्ति का लेखा नहीं होता है।
(6) इसमें पूर्वदत्त तथा अदत्त व्यय का समायोजन किया जाता है।
(7) इस खाते में उपार्जित एवं अनुपार्जित आय सम्बन्धी समायोजन किये जाते हैं।
(8) इसमें सम्पत्ति का हास तथा अशोध्य ऋणार्थ संचिति का समायोजन किया जाता है।
(9) इसमें रोकड़ शेष तथा सम्पत्ति नहीं दिखाई जाती है।
(10) इसके साथ चिट्ठा बनाना अनिवार्य है।
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