मूल्य ह्रास क्या है|मूल्य ह्रास क्यों लगाया जाता है || मूल्य ह्रास की विशेषताएँ| What is depreciation in hindi? | Characteristic of Depreciation.
मूल्य ह्रास (Depreciation)को अवक्षयण, घटौती, मूल्य अपकर्ष, सारा, घिसावट आदि भी कहते हैं। व्यापार का शुद्ध लाभ-हानि ज्ञात करने के लिए अन्य व्ययों के समान लेखा किया जाना भी आवश्यक होता है।
मूल्य ह्रास का अर्थ
मूल्य ह्रास किसी सम्पत्ति के गुण, परिमाण अथवा मूल्य में स्थायी तथा निरन्तर होने वाली कमी को कहते हैं। यह कमी सम्पत्ति के प्रयोग, समय बीतने, अप्रचलन अथवा नवीन आविष्कारों के कारण होती है।
मूल्य ह्रास की परिभाषा
अर्थ जानने के बाद चलिये अब मूल्य ह्रास की परिभाषा भी जान ले।
विलियम पिकल्स के अनुसार- "सम्पत्ति के गुण, परिमाण अथवा मूल्य में स्थायी व निरन्तर होने वाली कमी को मूल्य ह्रास कहा जाता है।"
जे.एन. कार्टर के शब्दों में- "एक सम्पत्ति के मूल्य में किसी भी कारण से होने वाली शनैः-शनैः या स्थायी कमी को ह्रास कहते हैं। "
मूल्य ह्रास के लक्षण या विशेषताएँ (Characteristics of Depreciation)
मूल्य ह्रास के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं
1. मूल्य में कमी: मूल्य ह्रास किसी स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में कमी बताता है। अतः इसके कारण सम्पत्ति का मूल्य कम हो जाता है।
2. पुस्तकीय मूल्य: मूल्य ह्रास का सम्बन्ध पुस्तकीय मूल्य (Book Value) से होता है, सम्पत्ति के क्रय वाले वर्ष में उसका लागत मूल्य ही पुस्तकीय मूल्य होता है।
3. स्थायी कमी- सम्पत्ति के पुस्तकीय मूल्य में यह कमी सदैव तथा स्थायी रूप से होती है।
4. निरन्तर कमी- मूल्य ह्रास से सम्पत्ति के मूल्य में कमी निरन्तर होती रहती है।
5. स्थायी सम्पत्तियों पर : मूल्य ह्रास केवल स्थायी सम्पत्तियों पर ही होता है, चल सम्पत्तियों पर नहीं।
6. प्रकृति - मूल्य ह्रास की प्रकृति व्यय की भाँति होती है। व्यापार का शुद्ध लाभ-हानि ज्ञात करने के लिए इसका लेखा करना अनिवार्य होता है।
7. प्रक्रिया - मूल्य ह्रास, सम्पत्ति की लागत को उसके जीवनकाल में वितरित करने (Allocation) की प्रक्रिया है।
8. पूर्वानुमान: मूल्य ह्रास का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
9. धीरे-धीरे कमी: स्थायी सम्पत्तियों के मूल्य में यह कमी धीरे-धीरे होती है।
10. गुण और परिमाण में कमी- मूल्य हास के कारण सम्पत्ति के गुण एवं परिमाण दोनों में कमी होती है।
मूल्य ह्रास उत्पन्न होने के कारण
जैसा की हम ने मूल्य ह्रास के अर्थ एवं विशेषताओं से जाना की सम्पत्तियों के मूल्य में कमी कई कारणों से होती है। आइये आने के इसके प्रमुख कारण क्या हैं-
1. निरन्तर प्रयोग द्वारा (Wear and Tear)- सम्पत्तियों को निरन्तर प्रयोग में लाने के कारण उनकी कार्यक्षमता क्रमशः कम होती जाती है। इसी कारण नित्य प्रयोग में आने वाली सम्पत्तियाँ, जैसे- भवन, यन्त्र, फर्नीचर, मोटरगाड़ी आदि के मूल्य में ह्रास होता है।
2. समय व्यतीत होना (Effluxion of Expiration of Time). कुछ सम्पत्तियाँ ऐसी होती हैं, जो एक निश्चित अवधि के लिए होती हैं तथा जिनका मूल्य समय की गति के साथ घटता जाता है, चाहे उनका उपयोग किया जावे अथवा नहीं। पट्टे पर ली गई सम्पत्ति (Leasehold Property), एकस्वाधिकार (Patent Right) और ठेका (Contract) इसी प्रकार की अमूर्त सम्पत्तियाँ हैं, जिनके मूल्य में ह्रास होता है।
3. अप्रचलन (Obsolescence)- नये आविष्कारों फलस्वरूप पुरानी सम्पत्तियाँ कम उपयोगी रह जाती हैं। अतः व्यावसायिक दृष्टि से पुराने यंत्र अनुपयोगी हो जाते हैं, जिन्हें बेचकर नये यंत्र खरीदने पड़ते हैं। ऐसी दशा में सम्पत्ति के पुस्तक मूल्य और विक्रय मूल्य में जो अन्तर होता है, उसे मूल्य ह्रास माना जाता है।
4. मूल पदार्थों की समाप्ति (Exhaustion of the subject matter)- कुछ सम्पत्तियाँ ऐसी होती है,जो निरन्तर उपयोग और उपभोग के कारण अपना मूल्य खोने लगती हैं। तेल के कुएँ, जंगल और खनिज पदार्थों की खानें इसी प्रकार की सम्पत्तियाँ हैं, जिनके दोहन के बाद उनके मूल पदार्थ समाप्त होने लगते हैं। और इनके में कमी आती जाती है। ऐसे हास को रिक्तीकरण (Depletion) कहते हैं। मूल्य )
आशा है इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आप मूल्य ह्रास (Depreciation) क्या है जान गए होंगे।
अधिक जानकारी के लिए visit करें : https://e-learningcommerce.blogspot.com
No comments:
Post a Comment