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Tuesday, February 22, 2022

मूल्यांकन की परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि | मौखिक परीक्षा | लिखित परीक्षा ।

मूल्यांकन की परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि। मौखिक परीक्षा |लिखित परीक्षा |संविदा वर्ग 3 महत्वपूर्ण विषय ।

परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि का  आशय।

ज्ञान पक्ष से सम्बन्ध

मूल्यांकन विधि


इस मूल्यांकन का सम्बन्ध ज्ञान पक्ष से है। यह मूल्यांकन दो प्रकार से किया जाता है:-

1. मौखिक परीक्षाएं

2. लिखित परीक्षाएं

1. मौखिक परीक्षाएं - मौखिक रूप से पूछकर बालकों के प्रत्यास्मरण, चिंतन, तुरंत अभिव्यक्ति,क्रियाशीलता, विश्लेषण, पढ़ने की योग्यता एवं उच्चारण की कुशलता आदि की जांच की जाती है। पूर्व प्राथमि स्तर पर बच्चों का मूल्यांकन इसी आधार पर किया जाता है। माध्यमिक स्तर पर कुछ विषयों में २०% अंकों की मौखिक परीक्षा ली जाती है। उच्च तथा उच्चतर स्तरों पर भी मौखिक परीक्षाओं को स्थान दिया गया है। मौखिक परीक्षायें विभिन्न प्रकार से ली जाती है। मौखिक इकाई परीक्षा, उच्चारण परीक्षा श्रवण योग्यता परीक्षण, भाषण योग्यता, भौखिक रूप से प्रश्न पूछकर आदि


लिखित परीक्षाएं. - वर्तमान शिक्षण पद्धति में छात्रों के मूल्यांकन हेतु सन 1904 में सर्वप्रथम ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में लिखित परीक्षा की गई । 

दो प्रकार की होती हैं.

1. वस्तुनिष्ठ परीक्षाएं।

2. निबन्धात्मक परीक्षाएं।


वस्तुनिष्ठ परीक्षाए -ये परीक्षायें क्रमशः स्कांतर बहु निर्वाचन, तुल्य या रिक्त स्थान पूर्ति के प्रश्नों पर आधानि होती है। इसमें सही उत्तरों को कुँजी के द्वारा अंकित किया जाग । यदि कोई उत्तर कुंजी के विपरीत है तो उसे गलत मापा जाता है। इसके अंतर्गत बालकों के विषय सम्बंधी ज्ञान की उपलब्धि, धौग्यता, अभिरूचि और बुद्धि आदि की यांच की जाती है। 


निबंधात्मक परीक्षाएं - यह परम्परागत परीक्षा प्रणाली की विधि है. इसके अंतर्गत सभी बालूक पाठ्यक्रम के सभी कई प्रश्नों के उत्तर निश्चित समय के अंदर निबंध के रूप में देते है। जिससे परीक्षक बालको के विचार तुलना, तर्क, आलोचना आदि शक्तियों के साथ-2 विचारों को संगठित करने की योग्यता, भाषा व शैली आदि की जांच सरलता से कर सकता है। निबंधात्मक • परीक्षाओं को ज्ञानात्मक वा भावनात्मक पक्षों के अधिगम के मापन के लिए प्रयोग किया जा सकता है यह दांतों के विश्लेषण तथा मूल्यांकन क्षमताओं के मापन के लिए होती है। प्रत्यास्मरण उत्तर देता है। इसमें छात्र अपनी स्मरण शक्ति के आधार पर सामान्य प्रत्यास्मरण - इसमें सामान्यतः कब क्या, कौन,  कहां व किसका से सम्बन्धित सूचनामा पूरक प्रश्न किये जाते है। जिनका एक ही विशिष्ट उत्तर होता है जो स्मरण शक्ति के आधार पर दिया जाता है। 

उदहारण:  प्र1. भारत के प्रथम राष्ट्रपति कौन थे ? 

                डा० राजेन्द्र प्रसाद |


               प्र2. विश्व पर्यावरण दिवस कब मनाया जाता है? 

               उत्तर: 5 जून 

विशेषता:  इसमें अनुमान से सही करने की सम्भावना

बिल्कुल नहीं होती 

*इनकी रचना करना तथा अंकन करना सरल होता है। 


* एक प्रश्न से एक उत्तर का ही मापन किया जाता है। ऐसे 10% प्रश्न ही परीक्षा में सम्मिलित किये जाने चाहिए


इन प्रश्नों को अपूर्ण कथनों में लिय जाता है। और छात्र अपनी स्मरण रिक्त स्थान पूर्ति क्षमता का प्रयोग करते हुए कथा पूर्ण करता है। रिक्त स्थान के लिए एक ही सही शब्द होता है। विशेषता इसमें अनुमान से सही उत्तर नहीं दिया जा सकता है।


* इनकी रचना तथा अंकन करना सरल होता है। इसमें प्रत्यास्मरण का अभ्यास होता है।

 * इनका प्रयोग ज्ञान उद्देश्य के मापन के लिए होता है। के विद्यार्थियों को उत्तर देने की स्वतंत्रता होती है। 

सुझाव -एक प्रक्ष में दो से अधिक रिक्त स्थाप नहीं दिये जाने चाहिए ।वाक्यो के प्रारंभ या अंत में रिक्त स्थान नहीं देने चाहिए । 10% प्रश्न ही परीक्षा में सम्मिलित किये जाने चाहिए


प्रत्याभिज्ञान - इसमें विद्यार्थी सही उत्तर को पहचानकर प्रश्न का समाधान करता है।


 एकांतर अनुक्रिया - इसमें प्रथम एक कथन के रूप में दिया नहीं, सही गलत जाता है जिसकी जांच विद्यार्थी हा सत्य असत्य के रूप में करते हैं। विशेषता इनकी रचना करना सरल है। कम समय में अधिक प्रश्नों के उत्तर दिये जाते हैं।  इनका अंकन करना अत्यंत सुविधाजनक है। 

 इन प्रश्नों के प्रयोग से परीक्षा की विश्वसनीयता तथ वैधता कम होती है।


सुझाव - ऐसे केवल 10% प्रश ही परीक्षा में सम्मिलित करना चाहिए। #तीसरा विकल्प अज्ञात ही होना चाहिए जिससे छात सही उत्तर दे सकें।


बहुनिर्वचन -इन प्रश्नों में एक कथन के लिए कई उत्तर दिये रहते हैं। इन विकल्पों में से छात को सबसे सही उत्तर का चयन करना होता है। इन प्रश्नों को ई. एफ. लिंडक्विस्ट ने उत्तम प्रकार का माना है। कानबेक एवं रॉस ने भी इसे सबसे उत्तम | प्रकार का माना है। विशेषतायें इसमें अनुमान से सही करने की सम्भावना कम होती है।

* इनका अंकन व विश्लेषण करना सरल होता है। तर्कपूर्ण चिंतन एवं सूझ की क्षमताओं की परीक्षण की जाती है।


* यह मापदण्ड उत्तम परीक्षा मानी जाती है। र सीमायें - सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकों में इनका प्रयोग नहीं किया जा सकता इनकी रचना करना कठिन होता है। 

* अनुमान से सही करने की सम्भावना रहती है।


सुझाव

* कम से कम 4 या अधिक से अधिक 6 विकल्पों का उपयोग करना चाहिए । * विकल्पों में समरूपता होनी चाहिए। * भाषा तथा व्याकरण आदि से सही विकल्प का बोध नहीं होना चाहिए। 

*-निर्देश स्पष्ट रूप से दिये जाने चाहिए।

* एक परीक्षा में 50% से अधिक प्रश्न सम्मिलित नहीं करने

समानता रूप : इन प्रश्नों को दो स्तम्भों में लिखा जाता एक स्तम्भ में कुछ न दिये जाते हैं दूसरे में उनके उत्तर दिये जाते हैं परन्तु उन्हें क्रमबद्धन जाता विशेषता - छात्र को सही उत्तर का चयन करना होता है- 

* ज्ञानात्मक उद्देश्यों के मापन के लिए अधिक  उपयोगी होते हैं। 

*इस प्रकार के प्रश्नों में अनुमान लगाना कठिन होता है।

* इन प्रश्नों को सूचना तथा ज्ञात उद्देश्ये के लिए ही प्रयोग किये जाते


* इसमें अनुमान लगाने का अवसर रहता है

* इनका अंकन तथा विश्लेषण कठिन होता स्तम्भों में समान खण्डों के होने पर अंतिम प्रश्न को उत्तर स्वतः ही मिल जाता है।


सुझाव -* दूसरे स्तम्भू में पहले स्तम्भ की अपेक्षा अधिक कथन होने चाहिए। 2 निर्देशों को स्पष्ट रूप से लिखना चाहि


वर्गीकरण. - इन अश्नों के अंतर्गत कुछ ऐसे शब्दों क समूह छांतों के सामने रखा जाता है। जिनमें से एक शब्द असंगत अथवा समूह के शब्दों भिन्न होता है। 


विशेषतायें - इस प्रकार के प्रश्नों को बोध उद्देश्य तथा विभेदीकरण के क्षमताओं के लिए प्रयुक्त किया जाता है। इनका उपयोग बुद्धि परीक्षण में ही किया जाता है।


सदृश्य अनुभव स्वरूप - इसमें दो समान परिस्थितयों को प्रस्तुत किया जाता है। पहली परिस्थिति पूर्ण तथा दूसरी परिस्थिति अपूर्ण होती है। पहली परिस्थिति के आधार पर समान सम्बन्ध स्थापित करते हुए दूसरी परिस्थिति उत्पन्न की जाती है। 

उदहारण:  मध्यप्रदेश : भोपाल :: उत्तर प्रदेश : लखनऊ


विशेषता - ★ इस प्रकार के प्रसों में सूक्ष्म तथा तार्किक क्षमताओं का मापन किया जाता है। *यह विश्लेषण के उद्देश्यों के मापन में प्रयोग किये जाते है। 

*क्रियात्मक पक्ष से सम्बन्धिल प्रायोगिक परीक्षाएं

किसी भी विषय के व्यवहारिक ज्ञान का मूल्यांकन करने हेतु प्रायोगिक परीक्षाएं ली जाती है। Exp Physics practical.

#मूल्यांकन की परिमाणात्मक मूल्यांकन विधि। मौखिक परीक्षा |लिखित परीक्षा.

Monday, February 21, 2022

MP Board Model Paper 2022 12 Business Studies. एमपी बोर्ड मॉडल पेपर 2022 12 व्यावसायिक अध्ययन।

MP Board Model Paper 2022 12 Business Studies. एमपी बोर्ड मॉडल पेपर 2022 12 व्यावसायिक अध्ययन। 

1. सही विकल्प चुनिए
(i) प्रबंध का पहला कार्य है

(अ) नियुक्ति करण
(ब) नियोजन
(स) समन्वय
(द) नियंत्रण
उत्तर: (अ) नियुक्ति करण


(ii) भारत में नवीन आर्थिक नीति लागू की गई थी

(अ) सन 1998 में
(ब) सन् 1991 में
(स) सन 1994 में
(द) सन् 1996 में
उत्तर: (ब) सन् 1991 में
(iii) अधिकार अन्तरण नहीं किया जा सकता है-

(अ) दैनिक कार्य का
(ब) सामान्य कार्य का
(स) सरल कार्य का
(द) गोपनीय कार्य का
उत्तर: (द) गोपनीय कार्य का

(iv) प्रशिक्षण में बल दिया जाता है
(अ) सैद्धांतिक ज्ञान पर
(ब) सर्वांगीण ज्ञान पर
(स) सामान्य ज्ञान पर
(द)  व्यावहारिक ज्ञान पर
उत्तर: (द)  व्यावहारिक ज्ञान पर

(v) सम्प्रेषण अंगूरलता के समान माना जाता-

(अ) औपचारिक सम्प्रेषण
(ब) अनौपचारिक सम्प्रेषण
(स) सरल कार्य का
(द) गोपनीय कार्य का
उत्तर: 
(ब) अनौपचारिक सम्प्रेषण

(vi) विपणन का कार्य नहीं है

(अ) विज्ञापन
(ब) परिवहन
(स) संग्रहण
(द) अभिप्रेरण
उत्तर: (द) अभिप्रेरण

Choose the Correct option:

(i) The first function of management is

(a) Staffing
(b) Planning
(c) Co-ordination
(d) Controlling
Answer: (b) Planning

(ii) New Economic policy was implemented in India
(a) In 1998
(b) In 1991
(c) In 1994
(d)  In 1996
Answer: (b) In 1991
(i) Delegation of Authority can not be done of-

(a) Routine work
(b) General work
(c) Easy work
(d) Secrete work
Answer: (d) Secrete work


(iv) Training gives emphasis on-

(a) Theoretical knowledge
(b) All round knowledge
(c) General knowledge
(d) Practical knowledge
Answer: (d) Practical knowledge

(v) The Following Communication resembles grapevine form of communication -
(a) Formal
(b) Informal
(c) Gestural
(d) written
Answer: (b) Informal


(vi) Which of the following is not a Function of Marketing

(a) Advertising
(b) Transportation
(c) Storing
(d) Motivation.
Answer: (d) Motivation.


2. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए-

(i) नियोजन.......... के बारे में सोचने की प्रक्रिया है।
(ii) विकेन्द्रीकरण
........का ही एक विकसित रूप है।
(iii) चयन एक साध्य है....... नहीं।
(iv) अभिप्रेरणा. ......प्रकार की होती हैं।
(v) वित्तीय प्रबंध, सामान्य प्रबंध की....... है।
(vi) .......द्वारा वस्तु की पहचान स्थापित की जाती है।
(vii) उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम,........में बनाया गया था।
उत्तर: (i) भविष्य   (ii) भ्रार्प न (iii) साधन (iv)  दो  (v)  (vi) विज्ञापन (vii) 1986.


Fill in the Blanks -
(i) Planning is the process of thinking about.....  (Future)
(ii) Decentralisation is a developed form of..... (Delegation)
(iii) Selection is an end, not....... (Means)
(IV) Motivation is ........type. (Two)
(v) Financial Management is ..........of general management. (Part)
(vi) The identification of product is established by........ (Advertisement)
(vii). Consumer's Protection Act was made in.... (1986)

3. सही जोड़ियाँ बनाईये

(i) मुख्य कार्यकारी अधिकारी।           (अ) पदोन्नति
(ii) हेनरी फेयोल                               (ब) उच्चस्तरीय प्रबंध
(iii) एफ डब्लू टेलर।                          (स) सामाजिक संबंध
(iv) अनोपचारिक संगठन।                  (द) परिसर भर्ती
(v) आंतरिक स्त्रोत                            (इ) प्रयोग का सिद्धांत
(vi) बाह्य स्त्रोत.                               (फ) अनुशासन का सिद्धांत
उत्तर: (i)  ब    (ii) फ  (iii) इ  (iv)  स    (v)  अ  (vi)  द

Match The Correct pairs of the Following
(i) Chief executive officer.    (a) Promotion
(ii) Henry Fayol.                      (b) Top level management
(iii) F.W. Taylor.                       (C) Social relation
(iv) Informal organisation.  (d) Campus recruitment
(v) Internal source.               (e) Principle of experiment
(vi) External source.            (f) Principle of discipline
Answer: (i)  b   (ii) f  (iii) e  (iv)  c    (v)  a  (vi)  d

4. एक वाक्य में उत्तर दीजिए-
(i) अधिकार अन्तरण के कितने तत्व होते हैं? (तीन)
(ii) वेतन कौन सी अभिप्रेरणा है? (मौद्रिक )
(iii) वास्तविक कार्य प्रगति और प्रमाप के अन्तर को क्या कहते हैं? (विचलन)
(iv) कच्चे माल की पूर्ति को बनाए रखना कौन सा नियंत्रण है? (सामग्री नियंत्रण)
(v) वित्तीय नियोजन कितने प्रकार का होता है? (दो)
(vi) मुद्रा बाजार का नियंत्रण किस संस्था द्वारा किया जाता है? (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड)
(vii) देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज कौन सा है? (राष्ट्रीय स्कन्द विपणी) NSE

Answer in one Sentence
(I) How many elements are there in delegation of authority? (Three)
(ii) Which types of motivation is Salary? (Monetary motivation)
(iii) What is the difference between actual
      Performance and Standard called as? (Deviation)
(iv) Which type of control refers to maintaining the supply of raw material? (Material Control)
(v) What are the various types of financial Planning? (Two)
(vi) Controlling of Money market is carried out by which institution? (Securities Exchange Board of India)
(vii) Which stock exchange is the greatest stock exchange of the country? (National Stock Exchange)

5. सत्य / असत्य में उत्तर लिखिए
(i)  बजट भावी अनुमानों पर आधारित होते हैं।  (सत्य)
(ii)  सम्प्रेषण सदैव लिखित में होते हैं।  (असत्य)
(ii)  नेतृत्व, निर्देशन का एक अंग है। (सत्य)
(iv) विचलन सदैव ऋणात्मक होता है। (असत्य)
(v)  पूँजी व्यवसाय का जीवन रक्त है। (सत्य)
(vi) पूँजी बाजार संगठित बाजार है। (सत्य)

Write answer in True/ False
(i) Budgets are dependent on future estimation.  (True)
(iii) Communication is always done in written. (False)
(iii) Leadership is a part of Directing. (True)
(iv) Deviation is always negative. (False)
(v) Capital is life blood of business. (True)
(VI) Capital market is an organised Market. (True)

6. " प्रबंध एक गतिशील प्रक्रिया है। स्पष्ट कीजिए।
"Management is a dynamic process." Clarify.
                        अथवा Or
नवप्रर्वतन से क्या आशय है? What is meant by "Innovation"?

7. प्रबंध के दो प्रमुख कार्य लिखिए।
Write two main functions of Management.
अथवा Or
प्रबंध की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।
Write any two characteristics of Management.

8. वैश्वीकरण से क्या आशय है?
What is meant by Globalisation?
                    अथवा Or
उदारीकरण से क्या आशय है?
What is meant by Liberalisation?

9. व्यावसायिक पर्यावरण से क्या आशय है?
What is meant by Business Environment?                                   
            अथवा Or
निजीकरण के कोई दो लाभ लिखिए ।
Write any two advantages of Privatisation.
10. नियोजन के कोई दो उदेश्य लिखिए।
Write any two objectives of Planning.
                         अथवा Or
  व्यूह रचना या रणनीति किसे कहते हैं?
   What is meant by Strategy?

11. अधिकार अंतरण से क्या आशय है?
What is meant by Delegation of Authority?
                          अथवा Or
विकेन्द्रीकरण से क्या आशय है? What is meant by Decentralisation?

12. औपचारिक तथा अनौपचारिक संगठन में दो अन्तर लिखिए।
Write any two differences between Formal and Informal Organisation.
           अथवा Or
संगठन के कोई दो उदेश्य लिखिए।
Write any two objectives of Organisation.

13. विपणन से क्या आशय है?
What is meant by Marketing?
            अथवा Or
जनसंपर्क क्या है?
What is Public Relation?

14. "ईको मार्क" स्कीम क्या है?
What is Eco-mark scheme?
             अथवा Or
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के कोई दो उदेश्य लिखिए। Write any two objectives of Consumer Protection act.

15 उपभोक्ता की कोई दो समस्याओं का वर्णन कीजिए। Describe any two problems of Consumer.         अथवा Or
उपभोक्ता के किन्हीं दो अधिकारों को लिखिए।
Write any two rights of Consumer.

16. वित्तीय एवं गैर वित्तीय अभिप्रेरणा से क्या आशय हैं?. What is meant by Financial and Non Financial Motivation.
                          अथवा Or
निर्देशन के कोई तीन सिद्धांतों का वर्णन कीजिए। Describe any three Principles of Directing.
17. नियंत्रण के कोई तीन उदेश्य लिखिए।
Write any three objectives of Controlling.
                   अथवा Or
प्रभावशाली नियंत्रण प्रणाली के कोई तीन आवश्यक तत्व लिखिए।
Write any three essential elements of effective Controlling System.
18. वित्तीय नियोजन की तीन सीमाऐं लिखिए ।
Write three limitations of Financial Planning.
                  अथवा Or
वित्तीय नियोजन के महत्व का वर्णन कीजिए।
Describe importance of Financial Planning.

19. वित्तीय बाजार के तीन कार्य लिखिए ।
Write three functions of Financial market.
                   अथवा Or
पूंजी बाजार व मुद्रा बाजार में तीन अंतर लिखिए।
Write three differences between Capital market and Money market.

20. हेनरी फेयोल द्वारा प्रतिपादित प्रबंध के चार सिद्धांतों को लिखिए ।
Write any four principles of management propounded by Henry Fayol.
              अथवा (Or
वैज्ञानिक प्रबंध की कोई चार विशेषताएं लिखिए।
Write any four characteristics of Scientific Management.

21. उद्देश्य एवं नीति में चार अंतर लिखिए।
Write any four differences between Objective and Policy.
                अथवा Or
नियोजन प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
Describe the process of Planning.

22. भर्ती एवं चयन में कोई चार अंतर लिखिए ।
Write any four differences between Recruitment and Selection.
                    अथवा Or
भर्ती के चार बाहय स्त्रोतों का वर्णन कीजिए।
Describe any four external sources of Recruitment.

23. विक्रय संवर्द्धन की किन्हीं चार विधियों का वर्णन कीजिए।
Describe any four methods of Sales Promotion.
                               अथवा Or

एक अच्छे ब्राण्ड की चार विशेषताएँ लिखिए।
Write any four characteristics of Good Brand.

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#MP Board Model Paper 2022 12 Business Studies.
#एमपी बोर्ड मॉडल पेपर 2022 12 व्यवसायिक अध्ययन। 

Saturday, February 19, 2022

प्रेषण (Consignment) का क्या अर्थ है | Preshan प्रेषण meaning in Hindi | अधिभावी कमीशन | परिशोध कमीशन | MPTET varg 1 Commerce.

Mptet varg 1 वाणिज्य (Commerce) विषय | प्रेषण (Consignment) का क्या अर्थ है | Preshan प्रेषण meaning in Hindi |अधिभावी कमीशन | परिशोध कमीशन | Consignment meaning in Hindi.

प्रेषण व्यवहार से आशय (Meaning of Consignment Transaction)

प्रेषण (Consignment) से आशय कमीशन के आधार पर विक्रय के उद्देश्य से प्रेषक(Consignor) द्वारा प्रतिनिधि (Consignee or Agent) को माल भेजने से है।"


Meaning of Consignment.
प्रेषण Consignment image

सामान्यतः प्रेषण से आशय माल भेजने से है। लेखाकर्म के अन्तर्गत उत्पादक अथवा निर्यातकर्ता अपने माल को विक्रय हेतु अपने प्रतिनिधि के पास भेजते हैं। प्रतिनिधि उस माल का विक्रय कर प्रतिफल के रूप में कमीशन (वर्तन) प्राप्त करते हैं। इस प्रकार माल के स्वामी अथवा प्रधान की ओर से विक्रय हेतु नियुक्त प्रतिनिधि को भेजा गया माल प्रेषण कहलाता है। दोनों पक्षों के मध्य हुए इस प्रकार का व्यावसायिक अनुबंध को प्रेषण व्यवहार (Consignment Transaction) कहते हैं। 

मुख्यतः प्रेषण व्यवहार माल के विक्रय के सम्बन्ध में होता है, किन्तु कभी-कभी प्रतिनिधि की नियुक्ति माल के क्रय या रुपया वसूली आदि के लिये भी की जाती है। प्रेषण व्यवहार में जिस व्यक्ति द्वारा माल भेजा जाता है अथवा प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है, उसे प्रेषक (Consignor) या प्रधान कहते हैं तथा जिस व्यक्ति या संस्था की नियुक्ति की जाती है, उसे प्रेषणी (Consignee) या प्रतिनिधि (Agent) कहा जाता है। प्रेषणी को जो प्रतिफल प्राप्त होता है, उसे वर्तन (Commission) कहते हैं। प्रेषण व्यवहार को चालान, एजेन्सी अथवा व्यापारिक भाषा में आढ़त भी कहते हैं। प्रेषक और प्रेषणी का सम्बन्ध प्रधान (Principal) और प्रतिनिधि (Agent) का होता है।

उदाहरण के लिये, यदि टाटा मोटर्स लि. ने 250 कार अपने भोपाल स्थित सांघी ब्रदर्स को विक्रय हेतु भेजी। यहाँ टाटा मोटर्स लि. मुम्बई प्रेषक अथवा प्रधान एवं सांघी ब्रदर्स लि. इन्दौर प्रेषणी अथवा एजेण्ट कहलायेंगे। इन दोनों पक्षों के मध्य हुए व्यावसायिक व्यवहार को ही प्रेषण व्यापार कहते हैं।

प्रेषण की विशेषताएँ या लक्षण (Characteristics of Consignment)

1. माल पर स्वामित्व- प्रेषण व्यवहार में प्रेषित किये गये माल पर तथा प्रेषणी के पास अनबिके माल पर प्रेषक का ही स्वामित्व रहता है। 

2. प्रतिफल प्रेषणी को उसकी सेवाओं के बदले कमीशन दिया जाता है। 

3. प्रेषक के उत्तरदायित्व पर विक्रय- प्रेषण के अन्तर्गत माल का विक्रय प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है, किन्तु इसका उत्तरदायित्व प्रेषक का ही रहता है।

4. आदेशानुसार कार्य प्रेषणी को प्रेषक के आदेश के अनुसार कार्य करना होता है।

5. उधार बिक्री पर दायित्व का हस्तान्तरण- सामान्यतः उधार बिक्री पर वसूली का उत्तरदायित्व प्रेषक का ही रहता है, किन्तु यदि प्रेषणी को परिशोध (Del-credere) कमीशन दिया जाता है, तो उधारी की राशि वसूलने का उत्तरदायित्व प्रेषणी पर आ जाता है।

6. प्रेषणी द्वारा अग्रिम राशि- प्रायः प्रेषक द्वारा माल भेजने के बदले प्रेषणी से अग्रिम राशि की मांग की जाती है।

7. बिक्री विवरण भेजना प्रेषणी द्वारा वर्षान्त अथवा किसी निश्चित समय के उपरान्त बिक्री विवरण (Accoun Sale) भेजा जाता है, जिसमें बेचे गये माल, उसके द्वारा किये गये व्यय, कमीशन आदि की जानकारी का उल्लेख रहता है। 8. प्रतिपूर्ति का अधिकार प्रेषणी को माल की विक्रय प्रक्रिया में अपने द्वारा किये गये व्ययों के

लिये प्रेषक से प्रतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार होता है।

प्रेषण व्यवहार सम्बन्धी शब्दावली

(Terms Used in Consignment Transactions) प्रेषण व्यवहार में निम्नलिखित शब्दों को प्रमुख रूप से प्रयोग किया जाता है

1. प्रेषक (Consignor)- यह माल का स्वामी होता है, जो अपनी जोखिम पर माल बेचने के लिए अपने प्रतिनिधि (प्रेषणी या एजेण्ट) के पास भेजता है। इसे प्रधान (Principal) या चालानकर्ता भी कहते हैं। 2. प्रेषणी (Consignee)- यह वह प्रतिनिधि होता है, जिसे आढ़त पर माल बेचने के लिए भेजा जाता है। इसे चालान पाने वाला या एजेण्ट भी कहा जाता है।

3. अभिकरण (Agency)- माल के स्वामी और विक्रय हेतु नियुक्त प्रतिनिधि के बीच होने वाले व्यवहारों को प्रतिनिधि के दृष्टिकोण से 'अभिकरण सम्बन्धी व्यवहार' कहा जाता है। इसे आढ़त व्यापार भी कहते हैं। यहाँ स्पष्ट कर देना उचित होगा कि आढ़त एक व्यापक शब्द है। यह कई प्रकार की होती है, जैसे- माल बेचने की आढ़त, माल खरीदने की आदत, ऋण वसूल करने की आदत आदि। प्रेषण के संदर्भ में आढ़त से आशय माल बेचने से लिया जाता है।

4. प्रेषण (Consignment)- जो माल प्रेषक द्वारा प्रेषणी को कमीशन पर बेचने के लिए भेजा जाता है, उसे प्रेषण कहते हैं। इसे 'चालान' भी कहा जाता है। प्रेषक के लिए वह बाह्य प्रेषण (Consignment (Outward) और प्रेषणी के लिए आन्तरिक प्रेषण (Consignment Inward) होता है।

5. प्रेषण खाता (Consignment Account)- प्रेषण पर लाभ अथवा हानि ज्ञात करने के लिये बनाया जाने वाला खाता 'प्रेषण खाता' कहलाता है। यह एक नाममात्र का खाता (Nominal Account) है, जो लाभ-हानि खाते की भाँति बनाया जाता है।
6. प्रेषित माल (Goods on Consignment)- वह माल जो प्रेषण पर बिक्री हेतु भेजा जाता है, प्रेषित माल कहलाता है। इसका लेखा प्रेषित माल खाते में किया जाता है। प्रेषित माल खाता वास्तविक खाता है।

7. प्रेषण स्कन्ध (Consignment Stock)- आढ़त पर बेचने के लिए भेजे गये माल में से जो माल प्रेषणी के पास बिकने से रह जाता है, उसे प्रेषण स्कन्ध कहते हैं। दूसरे शब्दों में, यह प्रेषण का बिना बिका माल है, जो प्रेषणी के पास होता है। इसलिए इसे प्रेषणी के पास स्कन्ध (Stock with Agent) भी कहते हैं।

8. कच्चा या दर्शनार्थ बीजक (Profoma Invoice)- प्रेषक द्वारा प्रेषित माल के लिए एक बीजक बनाया जाता है, जिसे कच्चा बीजक या दर्शनार्थ बीजक कहते हैं। इसे सूचनार्थ बीजक भी कहते हैं। इसमें माल की प्रकृति, मात्रा, मूल्य आदि का विवरण दिया होता है।
9. विक्रय विवरण (Account Sales) प्रेषणी समय-समय पर अथवा प्रेषित माल के बिक जाने पर
उसका हिसाब प्रेषक के पास भेजता है। वह हिसाब भेजने के लिए जो विवरण पत्र तैयार करता है, उसे विक्रय विवरण या विक्री विवरण कहते हैं। इसका विस्तृत उल्लेख आगे किया गया है।

10. प्रेषण व्यय (Consignment Expenses) प्रेषण के सम्बन्ध में प्रेषक और प्रेषणी जो भी व्यय करते हैं, वे प्रेषण व्यय कहलाते हैं। प्रेषित माल का संवेष्ठन व्यय, रेलभाड़ा, रास्ते का बीमा, माल की सुपुर्दगी लेने का व्यय, ऑक्ट्राय, गोदाम किराया, बिक्री व्यय आदि प्रेषण व्यय कहलाते हैं।

11. प्रेषण व्यवहार (Consignment Transactions)- प्रेषण के सम्बन्ध में प्रेषक और प्रेषणी के बीच जो व्यवहार होते हैं, वे प्रेषण व्यवहार कहलाते हैं।

12. प्रेषणी का पारिश्रमिक या कमीशन (Remuneration or Commission of Consignee)
प्रेषणी को प्रेषण की बिक्री की व्यवस्था के लिए अर्थात् उसकी सेवाओं के प्रतिफल में जो पारिश्रमिक दिया जाता है, उसे कमीशन कहते हैं। 


प्रेषणी का प्रतिफल या पारिश्रमिक (Remuneration of Consignee)

प्रेषणी को उसकी सेवाओं के बदले में प्रेषक द्वारा जो पारिश्रमिक दिया जाता है, उसे बहीखाते की भाषा में प्रेषणी का कमीशन या वर्तन कहते हैं। साधारणतया यह कमीशन, प्रेषण के बिक्री मूल्य पर प्रतिशत दर के आधार पर निश्चित किया जाता है। प्रेषणी को कमीशन निम्नलिखित रूप में दिया जा सकता है-

1. सामान्य कमीशन (Ordinary or General Commission) सामान्य कमीशन वह कमीशन है, जो प्रेषण की कुल बिक्री पर किसी निश्चित प्रतिशत दर से प्रेषणी को प्रेषक द्वारा दिया जाता है। इस प्रकार प्रेषणी जितना अधिक माल बेचता है, उसे उतना ही अधिक कमीशन मिलता है।
2. परिशोध कमीशन (Del-Credere Commission) सामान्यतया प्रेषणी, प्रेषक के उत्तरदायित्व और जोखिम पर माल बेचने का प्रबन्ध करता है। यदि प्रेषक की अनुमति से उधार माल बेचने पर ऋण की बसूली नहीं होती है, तो ऐसे डूबत ऋण की हानि प्रेषण हानि होती है, जिसे प्रेषक वहन करता है। डूबत ऋण से होने वाली हानि की जोखिम का भार प्रेषणी पर भी डाला जा सकता है। इस हेतु प्रेषक, प्रेषणी को सामान्य कमीशन के अतिरिक्त कुछ कमीशन और देता है, जिसे परिशोध कमीशन कहते हैं। संक्षेप में, परिशोध कमीशन वह पुरस्कार है, जो प्रेषक द्वारा प्रेषणी को डूबत ऋण के कारण होने वाली हानि की जोखिम का दायित्व वहन करने के लिए दिया जाता है। इसे आश्वासनार्थ कमीशन भी कहते हैं। ऐसा प्रेषणी 'परिशोध प्रेषणी' कहलाता है।

यदि प्रेषणी को परिशोध कमीशन दिया जाता है, तो प्रेषक डूबत ऋण की हानि को बहन करने के दायित्व से मुक्त रहता है। लेकिन अन्य हानियाँ, जैसे- माल चोरी होना, आग से जल जाना आदि की हानि का भार प्रेषक पर ही पड़ता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि परिशोध कमीशन पाने वाला प्रतिनिधि उधार विक्रय की दशा में डूबत ऋण होने पर स्वयं उत्तरदायी होता है। प्रेषणी की कमीशन रूपी आय डूबत की हानि से कम हो जाती है।

परिशोध कमीशन के प्रकार यह कमीशन निम्न दो प्रकार से दिया जाता है •
(1) कुल विक्रय राशि पर साधारणतया, परिशोध कमीशन की गणना कुल प्रेषण बिक्री पर ही की जाती है। किसी भिन्न या स्पष्ट निर्देश के अभाव में यह कमीशन सकल अर्थात् कुल प्रेषण बिक्री की राशि पर ही देय होता है। उपर्युक्त स्थिति में प्रश्न में प्रायः निम्नानुसार निर्देश होता है

"प्रेषणी कुल बिक्री पर 5% सामान्य कमीशन और 2% परिशोध कमीशन पाता है।" The Consignee receives ordinary commission of 5% of the gross proceeds and 2% as del-credere commission."

3. अधिभावी कमीशन (over-riding Commission)- अधिभावी कमीशन वह कमीशन है, जो प्रेषक द्वारा प्रस्तावित बिक्री मूल्य से ऊपर लिये गये बिक्री मूल्य (अधिक बिक्री मूल्य) पर एक निश्चित प्रतिशत की दर से प्रेषणी को दिया जाता है। यह एक विशेष कमीशन होता है, जो कि सामान्य कमीशन के अतिरिक्त दिया जाता है। अतः इसे अतिरिक्त कमीशन भी कहते हैं।



Wednesday, February 16, 2022

MP Board question bank 2022 class 12 Economics. Vimarsh portal.

MP board question bank 2022 class 12 Economics|Solution

MP board question bank 2022 class 12 Economics with Solution.

Q 1.Choose the correct option

1. Meaning of Microeconomics
(e) Study of individual economics Units
(b) Study of the whole economy
(c) Study of total national income
(d) None of these
Answer: (e) Study of individual economics Units

 
2. Identify the central problem that relates to the quantity of goods to be produced is related to -
(a) What is to be produced?
(b) How to produce?
(c) For whom to produce?
(d) none of these
Answer: (a) What is to be produced?

3. Macro economics is concerned with-
(a) individual quantities
(b) From personal production
(c) Aggregate quantities
(d) all of therm
Answer: (c) Aggregate quantities

4. In which the following economies, importance is given to social interest and welfare?
(a) in a capitalist economy 
(b) Socialist economy
(c) in a mixed economy
(d) in an underdeveloped economy
Answer: (b) Socialist economy

5. Which of the following problems has been considered by Samuelson as the fundamental problem of the economy?
(a) Which goods should be produced in what quantity
(b) How to produce goods?
(c) For Whom should the goods be produced?
(d) All of the above
Answer: (d) All of the above

6. The sectors are  in the economy-
(a) two  (b) three  (c) Four  (d) none of these

Answer: (b) three

7. Which of the following is not a department of economics?
(a) Consumption
(b) Exchange
(c) Delivery
(d) Budget
Answer: (d) Budget

8. Microeconomics studies -
(a) of national production
(b) Specific firms
(c) Levels of prices
(d)all of the above
Answer: (b) Specific firms

9. Microeconomics does not pay attention to which of the following-
(a) Problem of unemployment
(b) inflation in the economy
(c) aggregate demand
(d) jute industry
Answer: (d) jute industry

10. Which of the following is an example of positive economics-
(a) Steps taken by India to control price rise (b) Abnormal distribution of income in an economy
(c) India should not be a populous country Income
(d) Reduction in unequal distribution.
Answer: (a) Steps taken by India to control price rise

11. "Economics is the study of mankind in the ordinary business of life this definition is given by -
(a) Adam Smith
(b) robbins
(c)-Marshall
(d) Pigoo
Answer: (c)-Marshall

12. Who first used the word "Micro"?
(a) Marshal
(b)Bolding
(c) Keynes
(d) Regner Frisch
Answer: (d) Ragner Frisch

 
13. The fault of microeconomics is
(a) No knowledge of the whole economy
(b) not applicable to the group
(c) Unrealistic beliefs

(d) All the Above
Answer: (d) All the Above

14. Which of the following is not an economic activity?
(a) Teaching by teacher
(b) the treatment of the patient by the
(c) black marketing
(d) Agricultural work by farmer
Answer: (c) black marketing

15. What is the nature of economics?
(a) Science
(b) art
(c)both science and art
(d) none of these
Answer: (c)both science and art

16.When a person buys goods to satisfy  his needs, he is called-
(a) consumer
(b) producer
(c)service holder
(d) Service Provider
Answer: (a) consumer

2.Very short answer type questions
(each question is of 2 marks, word limit is about 30 words)

1. What is meant by microeconomics?
2. The main instrument of microeconomics is the price instrument. explain.
3. What is meant by economy?
4. What is meant by capitalist economy?
5. What is meant by the central problem of the economy?
6. What is meant by socialist economy?

3. Short Answer Type Questions (Each question carries 3 marks, word limit 75
1. Write the features of socialist economy.
2. Write the limitations of microeconomics.
3, Differentiate between a centrally planned economy and a market economy.
4. Write any three features of capitalist economy.
5. State three main features of a mixed economy.
6. Write any three reasons for the occurrence of economic problems.
7. What are the central problems of an economy?
8.Explain the difference between microeconomics and macroeconomics



Tuesday, February 15, 2022

खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही क्या है ? What is Petty cash Book

खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही क्या है?  What is Petty cash Book n hindi ?

खुदरा रोकड़ / लघु रोकड़ बही का आशय 
लघु रोकड़ बही व्यापार के नकद व्ययों को लिखने की वह  बही है, जिसमें प्रतिदिन के छोटे-छोटे फुटकर व्ययों का लेखा किया जाता है। इसे खुदरा रोकड़ बही भी कहते हैं। 

खुदरा रोकड़ / लघु रोकड़ बही की परिभाषा

पिकिल्स के अनुसार, "बड़े-बड़े व्यापार गृहों में अनेक ऐसे छोटे-छोटे व्यय होते हैं, जिनका पुगतान रोकड़ में किया जाता है। यदि वे सब व्यय विस्तृत रूप में रोकड़ बही में लिखे जायें तो बहुत सा बहुमूल्य समय नष्ट हो जाता है। समय की बचत के लिए पृथक से एक रोकड़ बही रखी जाती है और उसमें बुझा व्ययों का लेखा किया जाता है। इसे लघु या खुदरा रोकड़ बही कहा जाता है।"


खुदरा अथवा लघु रोकड़ बही की आवश्यकता (Necessity of Petty Cash Book)

प्राय: प्रत्येक बड़े व्यापारी के यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-छोटे खर्चे होते रहते हैं, जैसे- मजदूरी, डाक खर्च, ताँगा भाड़ा, ढुलाई, लेखन-सामग्री, चाय-पान व्यय आदि। इनमें से कई खर्च दिन में अनेक बार होते हैं। इस प्रकार के छोटे-छोटे खर्चों का लेखा करना रोकड़िये (Cashier) के लिए बड़ा ही दुविधाजनक होता है। उसको अनेक लेखे करने पड़ते हैं, जिससे उसका काम बढ़ जाता है। अधिक कार्य-भार के कारण भूल होने का भी डर रहता है। वह बड़े-बड़े लेन-देनों की ओर पूरा ध्यान भी नहीं दे पाता है। अतएव इन कठिनाइयों से मुक्ति के लिए व्यापारिक संस्थाओं में जहाँ फुटकर और छोटे-छोटे खर्च अधिक संख्या में होते है, एक पृथक बहीं की आवश्यकता उत्पन्न हुई। इसी पृथक बही को लघु रोकड़ बही कहते हैं। लघु रोकड़ नही को फुटकर रोकड़ बही और खुदरा रोकड़ बही भी कहा जाता है। 

लघु रोकड़ बही लिखने का दायित्व एक अन्य कर्मचारी को सौंप दिया जाता है। इसे लघु रोकड़िया (Petty Cashier) कहते हैं।

लघु रोकड़ बही के लाभ (Advantages of Petty Cash Book) 

लघु रोकड़ बही से प्राप्त होने वाले प्रमुख लाभ निम्नानुसार हैं-

(1) लघु रोकड़ बही में व्यापार के फुटकर व्ययों का उचित और पूरा लेखा रहता है। 

(2) इसमें छोटे-छोटे व्ययों का पूर्ण विवरण एक ही स्थान पर मिल जाता है। 

(3) लघु रोकड़ बही रखने से श्रम विभाजन हो जाता है, जिससे सरलता एवं शीघ्रता से हिसाब रखा जा सकता है। (4) लघु रोकड़ बही रखने पर छोटे-छोटे व्ययों की प्रविष्टि तुरन्त कर | जाती है, जिसके कारण उनके भूलने की संभावना कम हो जाती है। 

(5) लघु रोकड़ पुस्तक बनाये जाने पर खतौनी करने में सुविधा रहती हैं।

(6) प्रमुख रोकड़िया के समय एवं श्रम की बचत होती है, क्योंकि वह फुटकर व्ययों के लेखे से मुक्त हो जाता है। 

(7) फुटकर व्ययों का ज्ञान रहने से अनावश्यक फुटकर व्ययों को नियंत्रित किया जा सकता है। 

(8) लघु रोकड़ बही लिखने का कार्य एक साधारण लिपिक सरलता से कर सकता है।

(9) लघु रोकड़ बही की जाँच समय-समय पर प्रमुख रोकड़िया द्वारा की जाती है, इससे हिसाब में हेराफेरी अथवा जालसाजी की संभावना कम रहती है।

लघु रोकड़ बही की अग्रदाय पद्धति (Imprest System of Petty Cash Book)


अग्रदाय पद्धति के अनुसार प्रत्येक माह के प्रारंभ में लघु रोकड़िया को एक माह के संभावित का खर्च के लिए पर्याप्त रकम दे दी जाती है। इस अग्रिम प्राप्त रकम से लघु रोकड़िया माह के फुटकर व्या भुगतान करता रहता है। फुटकर व्ययों की रकम को वह लघु रोकड़ पुस्तक से सम्बन्धित स्तम्भों में जमा कर है। लघु रोकड़िया जब भुगतान करता है तो वह उन भुगतानों की रसीदें या प्रमाणक ले लेता है।

माह के अन्त में फुटकर रोकड़ पुस्तक और भुगतान के प्रमाणकों का निरीक्षण प्रधान रोकड़िया द्वारा किया जाता है। जाँच करने के पश्चात् वह फुटकर व्ययों में जितनी रकम खर्च हो गयी है उतनी रकम रोकड़िया को वापिस लौटा देता है और सम्बन्धित आय-व्यय खातों में उनका लेखा कर लेता है। इस प्रजन रकम माह समाप्त होने के पूर्व ही खर्च प्रति माह यह क्रम चला करता है। जिससे हर माह के प्रारम्भ में लघु रोकड़िया के पास अग्रिम रकम उतनी हो हो जाती है, जितनी कि उसके पास प्रारम्भ में थी। यदि अग्रिम दी हो जाती है तो फुटकर रोकड़ बही का उसी समय निरीक्षण कर खर्च की गई रकम लघु रोकड़िया को देक जाती है। लघु रोकड़ बही की इस पद्धति को अग्रदाय पद्धति कहते हैं।


अग्रदाय पद्धति की विशेषताएँ (Characteristics of Imprest Systern)


लघु रोकड़ बही की अग्रदाय पद्धति में निम्न विशेषताएँ होती हैं-

(1) लघु रोकड़िये को प्रारम्भ में एक-दो सप्ताह के फुटकर खर्च के लिए पर्याप्त रकम दी जाती है।

(2) लघु रोकड़ के लिए आगे रकम तब ही दी जाती है, जबकि पूर्व भुगतानों का ठीक-ठीक हिसाब दे दिया गया हो। 

(3) आगे दी जाने वाली रकम प्रारम्भ में दी गयी रकम से अधिक नहीं हो सकती।

(4) समस्त फुटकर भुगतानों की रसीद आवश्यक होती है। (5) लघु रोकड़ में अधिकतम भुगतान की राशि निश्चित रहती है।

(6) लघु रोकड़िये को फुटकर खर्च के लिए प्रधान रोकड़िये से ही राशि प्राप्त होती है। फुटका प्राप्ति लघु रोकड़िये को नहीं दी जाती है।


 

Monday, February 14, 2022

मूल्य ह्रास क्या है || मूल्य ह्रास क्यों लगाया जाता हैWhat is Depreciation in hindi?

मूल्य ह्रास क्या है|मूल्य ह्रास क्यों लगाया जाता है || मूल्य ह्रास की विशेषताएँ| What is depreciation in hindi? | Characteristic of Depreciation.

मूल्य ह्रास (Depreciation)को अवक्षयण, घटौती, मूल्य अपकर्ष, सारा, घिसावट आदि भी कहते हैं। व्यापार का शुद्ध लाभ-हानि ज्ञात करने के लिए अन्य व्ययों के समान लेखा किया जाना भी आवश्यक होता है।


मूल्य ह्रास का अर्थ

मूल्य ह्रास किसी सम्पत्ति के गुण, परिमाण अथवा मूल्य में स्थायी तथा निरन्तर होने वाली कमी को कहते हैं। यह कमी सम्पत्ति के प्रयोग, समय बीतने, अप्रचलन अथवा नवीन आविष्कारों के कारण होती है।


मूल्य ह्रास की परिभाषा

अर्थ जानने के बाद चलिये अब मूल्य ह्रास की परिभाषा भी जान ले।

विलियम पिकल्स के अनुसार- "सम्पत्ति के गुण, परिमाण अथवा मूल्य में स्थायी व निरन्तर होने वाली कमी को मूल्य ह्रास कहा जाता है।"

 जे.एन. कार्टर के शब्दों में- "एक सम्पत्ति के मूल्य में किसी भी कारण से होने वाली शनैः-शनैः या स्थायी कमी को ह्रास कहते हैं। "


मूल्य ह्रास के लक्षण या विशेषताएँ (Characteristics of Depreciation)


 मूल्य ह्रास के मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं

1. मूल्य में कमीमूल्य ह्रास किसी स्थायी सम्पत्ति के मूल्य में कमी बताता है। अतः इसके कारण सम्पत्ति का मूल्य कम हो जाता है। 

2. पुस्तकीय मूल्य:  मूल्य ह्रास का सम्बन्ध पुस्तकीय मूल्य (Book Value) से होता है, सम्पत्ति के क्रय वाले वर्ष में उसका लागत मूल्य ही पुस्तकीय मूल्य होता है। 

3. स्थायी कमी- सम्पत्ति के पुस्तकीय मूल्य में यह कमी सदैव तथा स्थायी रूप से होती है। 

4. निरन्तर कमी- मूल्य ह्रास से सम्पत्ति के मूल्य में कमी निरन्तर होती रहती है।

5. स्थायी सम्पत्तियों पर : मूल्य ह्रास केवल स्थायी सम्पत्तियों पर ही होता है, चल सम्पत्तियों पर नहीं।

6. प्रकृति - मूल्य ह्रास की प्रकृति व्यय की भाँति होती है। व्यापार का शुद्ध लाभ-हानि ज्ञात करने के लिए इसका लेखा करना अनिवार्य होता है।

7. प्रक्रिया - मूल्य ह्रास, सम्पत्ति की लागत को उसके जीवनकाल में वितरित करने (Allocation) की प्रक्रिया है।

8. पूर्वानुमान:  मूल्य ह्रास का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।

9. धीरे-धीरे कमी:  स्थायी सम्पत्तियों के मूल्य में यह कमी धीरे-धीरे होती है।

10. गुण और परिमाण में कमी- मूल्य हास के कारण सम्पत्ति के गुण एवं परिमाण दोनों में कमी होती है।

मूल्य ह्रास उत्पन्न होने के कारण

 जैसा की हम ने मूल्य ह्रास के अर्थ एवं विशेषताओं से जाना की सम्पत्तियों के मूल्य में कमी कई कारणों से होती है। आइये आने के इसके  प्रमुख कारण क्या हैं-


1. निरन्तर प्रयोग द्वारा (Wear and Tear)- सम्पत्तियों को निरन्तर प्रयोग में लाने के कारण उनकी कार्यक्षमता क्रमशः कम होती जाती है। इसी कारण नित्य प्रयोग में आने वाली सम्पत्तियाँ, जैसे- भवन, यन्त्र, फर्नीचर, मोटरगाड़ी आदि के मूल्य में ह्रास होता है।

2. समय व्यतीत होना (Effluxion of Expiration of Time). कुछ सम्पत्तियाँ ऐसी होती हैं, जो एक निश्चित अवधि के लिए होती हैं तथा जिनका मूल्य समय की गति के साथ घटता जाता है, चाहे उनका उपयोग किया जावे अथवा नहीं। पट्टे पर ली गई सम्पत्ति (Leasehold Property), एकस्वाधिकार (Patent Right) और ठेका (Contract) इसी प्रकार की अमूर्त सम्पत्तियाँ हैं, जिनके मूल्य में ह्रास होता है। 

3. अप्रचलन (Obsolescence)- नये आविष्कारों फलस्वरूप पुरानी सम्पत्तियाँ कम उपयोगी रह जाती हैं। अतः व्यावसायिक दृष्टि से पुराने यंत्र अनुपयोगी हो जाते हैं, जिन्हें बेचकर नये यंत्र खरीदने पड़ते हैं। ऐसी दशा में सम्पत्ति के पुस्तक मूल्य और विक्रय मूल्य में जो अन्तर होता है, उसे मूल्य ह्रास माना जाता है। 

4. मूल पदार्थों की समाप्ति (Exhaustion of the subject matter)- कुछ सम्पत्तियाँ ऐसी होती है,जो निरन्तर उपयोग और उपभोग के कारण अपना मूल्य खोने लगती हैं। तेल के कुएँ, जंगल और खनिज पदार्थों की खानें इसी प्रकार की सम्पत्तियाँ हैं, जिनके दोहन के बाद उनके मूल पदार्थ समाप्त होने लगते हैं। और इनके में कमी आती जाती है। ऐसे हास को रिक्तीकरण (Depletion) कहते हैं। मूल्य )

आशा है इस ब्लॉग को पढ़ने के बाद आप मूल्य ह्रास (Depreciation) क्या है जान गए होंगे।

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Sunday, February 13, 2022

MP Board Model paper 2022 12th Accountancy.

MP Board Model paper 2022 12th  Accountancy.

MP BOARD has issued Model paper before Board examination of all Subjects of Class 12th and 10th. 

Read Model paper of Accountancy Subject MCQs Questions with answer. Prepare it well for final exams :-


Q1. Choose the correct options-

(I) Which basis Non-Profit organization  maintain their books of Account?
(A) Double entry system
(B) Single entry system
(C) Cash system
(D) Indian accounting system 
Answer: (C) Cash System.

(II) Excess of actual profit over normal Profit is called?
(A) Normal Profit
(B) Average Profit
(C) Contingent Profit
(D) Super Profit
Answer: (D) Super Profit

(III) Goodwill is :--
(A) Floating assets
(B) Fixed assets
(C) Tangible assets
(D) Fictitious assets
Answer: (D) Fictitious assets

(IV) Debenture holders of a company came under the category of --
(A) Owners
(B) Creditors
(C) Employees
(D) Debtors
Answer: (B) Creditors

(V) The following is not a tool of analysis of Financial Statements :--
(A) Trial Balance
(B) Comparative Statement
(C) Ratio Analysis
(D) Common size statement
Answer: (A) Trial Balance.

(VI) Cash flow statement is related to -
(A) Accounting standard -3
(B) Accounting Standard- 6
(C) Accounting Standard -9
(D) Accounting standard -12
Answer: (A) Accounting standard -3

Q2. Match the column:
                    A.                                               B
i First Payment after Dissolution.                   (A)
Partner's Loan. 

ii On death of Partner his share  is paid         (B) not compulsory.

iii Internal liability of the firm.                           (C) To Legal Representative

iv External liability of the firm.                           (D) Is compulsory

V Preparation of Partnership deed.                 (E) To Third party

vi Profit distribution in partnership.                  (F)  Bank Loan


Answers:  (i) E     (ii)   C   (iii)  A  (iv)  F   (v) B (vi) D

Q3. Write Answer in one Sentence.

(1) Donation received from specific purpose is called ? 
Answer: Special Donation

(II) In which side Bank overdraft Account  written in Receipts and payment? 
Answer: Payment side.

(III) The share issued more than face value is called ? 
Answer: Share issue at Premium

(IV) What are those debenture more than face value is called which can be converted in share ? 
Answer: Convertibles Debenture.

(V) That capital by which no company can issue more shares ? 
Answer: Authorized Capital.

(VI) Under which heading proposed dividend is shown in companies balance sheet ? 
Answer: Short term Provision

(VII) The person by whom is a company established is called ?  
Answer: Promoters

Q5.Write True/ False :
(I) Only Capital items are shown the Receipts Payment Account. False
(II) Premium is a Capital Profit.  False
(III) Debentures are of short term loan in nature. False
(IV) Company's Balance Sheet can prepared in Horizontal form. True
(V) Contingent liabilities are added in total of liabilities. False
(VI) The Financial statement are indicator of the solvency of business. True


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Friday, February 11, 2022

Meaning of Price Floor or Minimum Support Price(MSP) and Price Ceiling.

Meaning of Price Floor or Minimum Support Price(MSP) and Price Ceiling | Government Intervention in Price Fixing

Government Intervention in Price Fixing

As you know the Price of Goods or services are determined at  equilibrium where Demand and Supply are equal( known as price Equilibrium) in market (without government interference). In the real world. markets are hardly free from government interference. Sometimes, the government has to intervene in the process of price determination when the equilibrium price so determined is either very high for the consumers or very low (non-profitable) for the producers of the commodity.


The government interventions may be of two types Price ceiling and Price Floor (Minimum Support Price) - We shall discuss them in detail here after.

(1). Concept of Price Ceiling

(a) By price ceiling we mean fixing the maximum price of a commodity at level lower than the equilibrium price by the Government. It is done for controlling the prices of essential commodities when the equilibrium price determined by free play of demand supply forces is too high to afford for poor people.


Price ceiling usually is imposed on essential commodities below the equilibrium price or market determined price. The main reason for such decision is that the equilibrium price is very high for common people to afford.


(2) Concept of Price Floor or Minimum Support Price (MSP) 

(a) Meaning- The Government may intervene the process of price determination by means of price floor. "Price Floor means the minimum price above equilibrium price) fixed by the government, which the producers must be paid for their produce." It is also called minimum price ceiling.

(b) Need for Price Floor- The need for price floor arises when the government finds that equilibrium price is too less for the producers to meet the cost production, particularly in agricultural sector. The Government of India maintains a variety of price support programmes for a number of agricultural products such as wheat, sugarcane etc. The floor is usually set up at a level higher than the market determined price of these commodities.


MP Board Model Paper 2022 class 12 Accountancy. माध्यमिक शिक्षा मंडल लेखांकन का मॉडल पेपर 12।

MP Board Model Paper class 12 Accountancy. माध्यमिक शिक्षा मंडल लेखांकन का मॉडल पेपर 12.

MP Board Model Paper class 12 Accountancy. माध्यमिक शिक्षा मंडल लेखांकन का मॉडल पेपर 12.

प्रश्न-1. सही विकल्प चुनिए

(1) गैर व्यावसायिक संस्थाएं अपना हिसाब किताब किस पद्धति से रखती हैं : 

(अ) दोहरा लेखा प्रणाली       (ब) इकहरा लेखा प्रणाली

(स) रोकड़ प्रणाली.              (द) भारतीय बही खाता पद्धति

उत्तर: रोकड़ प्रणाली.  

2. सामान्य लाभ पर वास्तविक लाभ का आधिक्य कहलाता है :

(अ) सामान्य लाभ               (ब) औसत लाभ

(स) आकस्मिक लाभ           (द) अधिलाभ

उत्तर: (द)  अधिलाभ

3. ख्याति है :

(अ) एक चल संपत्ति         (ब) एक स्थायी संपत्ति

(स) एक मूर्त संपत्ति         (द) एक कृतिम संपत्ति

उत्तर: (द) एक कृतिम संपत्ति

4. कंपनी के ऋण पत्र धारी किस श्रेणी में आते हैं :

(अ) स्वामी                    (ब) लेनदार

(स) कर्मचारी                 (द) देनदार

 उत्तर : (ब) लेनदार

5. कौनसा वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का उपकरण नहीं है :

(अ) तलपट.                  (ब) तुलनात्मक विवरण

(स) अनुपात विश्लेषण   (द) समाकार विवरण

उत्तर : (अ) तलपट

(6) रोकड़ प्रवाह विवरण संबंधित है :

(अ) लेखांकन प्रमाप-3 से    (ब) लेखांकन प्रमाप-6 से

(स) लेखाकन प्रमाप 9 से      (द) लेखाकन प्रमाप-12 से

उत्तर:(अ) लेखांकन प्रमाप-3 से

प्रश्न-2 रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए: -

(1) प्राप्ति भुगतान खाता........व्यवहारों का सारांश है। (रोकड़)

(2) साझेदारी ठहराव में परिवर्तन साझेदारी फर्म का.. .....कहलाता है। (पुनर्गठन)

(3).साझेदारी में सांझेदारों का दायित्व...... होता है। (असीमित)

(4) दायित्वों में कमी फर्म का...... होता है। (लाभ)

(5) अंश हरण खाते का शेष......खाते में हस्तांतरित किया जाता है। (पूँजी संचय)

(6) ........अंशों पर लाभांश की दर निश्चित होती है। (पूर्वाधिकार)

(7) विक्रय अनुपातों को .......अनुपात भी कहा जाता है।

(आवर्त)

प्रश्न- 3 सही जोड़ी बनाईये

i विघटन के पश्चात प्रथम भुगतान.          A साझेदार का ऋण

ii साझेदार की मृत्यु पर उसके हिस्से का.  B अनिवार्य नहीं

भुगतान

iii. फर्म का आंतरिक दायित्व.                C कानूनी उत्तराधिकारी को

iv.  फर्म का बाह्य दायित्व.                     D अनिवार्य है    

V साझेदारी संलेख बनाना.                    E तृतीय पक्ष को

vi सझेदारी में लाभों का बाटना.              F बैंक ऋण

उत्तर:  (i) E     (ii)   C   (iii)  A  (iv)  F   (v) B    (vi) D

प्रश्न - 4.  एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

i  विशेष कार्य के लिए प्राप्त दान क्या कहलाता है ?

उत्तर: विशेष दान

ii. बैंक अधिविकर्ष प्राप्ति भुगतान खाते के किस पक्ष में लिखा जाएगा ?

उत्तर:-भुगतान पक्ष में

iii. अंकित मूल्य से अधिक मूल्य पर अंशों का निर्गमन क्या कहलाता है ?

उत्तर: प्रीमियम पर अंशो का निर्गमन

iv. वे ऋण पत्र जो अंश में बदले जा सकते हैं, क्या कहलाते हैं ? 

उत्तर: परिवर्तनशील ऋणपत्र

v. यह पूंजी जिससे अधिक अंशों का निगर्मन कंपनी द्वारा नहीं किया जा सकता ?

उत्तर: अधिकृत पूँजी

vi. प्रस्तावित लाभांश को कंपनी के चिट्ठे में किस शीर्षक के अंतर्गत दर्शाया जाता है ?

उत्तर: अल्पकालीन प्रावधान

vii कंपनी की स्थापना करने वाले व्यक्ति को कहते हैं ?

उत्तर: प्रवर्तक

प्रश्न-5 निम्नलिखित का सत्य/ असत्य में उत्तर दीजिये-

(i) प्राप्ति भुगतान खाते में केवल पूंजीगत मदें ही लिखते हैं। असत्य

( ii ) प्रीमियम एक पूंजीगत लाभ है। सत्य

(iii) ॠण पत्र अल्पकालीन ऋण की प्रकृति के होते हैं। असत्य

(iv) कंपनी के चिट्ठे को क्षैतिज रूप में बनाया जा सकता है। सत्य

(v) आकस्मिक दायित्वों को दायित्व पक्ष के योग में सम्मिलित किया जाता है। असत्य

(vi) वित्तीय विवरण व्यवसाय की शोधन क्षमता के सूचक हैं। सत्य