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Monday, November 1, 2021

Mptet varg 1 वाणिज्य (Commerce) महत्वपूर्ण विषयवस्तु | समाधान विवरण का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ।

बैंक समाधान विवरण का अर्थ, परिभाषा और विशेषताएँ। Mptet varg 1 वाणिज्य (Commerce) महत्वपूर्ण विषयवस्तु।


बैंक समाधान विवरण का अर्थ 

(Meaning  of Bank Reconciliation Statement)


रोकड़ बही और पास बुक के शेषों की विषमता को दूर करने के लिए व्यापारी द्वारा एक विवरण तैयार किया जाता है। इस विवरण को ही बैंक समाधान विवरण कहते हैं।

रोकड़ बही और पास बुक दोनों में एक ही लेन-देन लिखे जाते हैं, अत: जिस दिन भी दोनों पुस्तकों के बैंक शेषों का मिलान किया जाये तो उनमें कोई अन्तर नहीं पड़ना चाहिये। परन्तु वस्तु स्थिति कुछ भिन्न ही होती है। प्रायः इन दोनों पुस्तकों के शेष परस्पर मिलान नहीं खाते हैं, यद्यपि वे अपने-अपने स्थान पर ठीक होते हैं। इन शेषों का मिलान करने के लिए ही बैंक समाधान विवरण बनाया जाता है।

#आइये बैंक समाधान विवरण को और विस्तार से समझते है।

बैंक में जमा की गई राशि (नकद और चेक दोनों) आहरण के समय डेबिट पक्ष (अर्थात, प्राप्ति पक्ष) पर दो-स्तंभ कैश बुक के बैंक कॉलम में दर्ज की जाती है और चेक जारी करना क्रेडिट पक्ष (यानी, भुगतान पक्ष) पर दर्ज किया जाता है। 

बैंक खाताधारक का खाता अपनी बहीखातों में भी रखता है। खाताधारक द्वारा जमा खाता धारक के खाते के क्रेडिट पक्ष पर और डेबिट पक्ष पर निकासी दर्ज की जाती है। इसकी एक प्रति खाताधारक को स्टेटमेंट या पास बुक के रूप में उसके रिकॉर्ड और सुलह के लिए दी जाती है। इस प्रकार, कैश बुक में डेबिट प्रविष्टियां बैंक स्टेटमेंट या बैंक पास बुक के क्रेडिट पक्ष पर दिखाई देती हैं (दिखाई जाती हैं), जबकि रोकड़ बही में क्रेडिट प्रविष्टियां बैंक स्टेटमेंट या बैंक पास बुक के डेबिट पक्ष पर दिखाई देती हैं (दिखाई जाती हैं)। रोकड़ बही और बैंक स्टेटमेंट या पास बुक दोनों में दर्ज की गई अवधि के दौरान किए गए जमा और निकासी से संबंधित लेनदेन, अवधि के अंत में दो रिकॉर्ड द्वारा दिखाए गए शेष सामान्य रूप से सहमत होने चाहिए, अर्थात समान होना चाहिए। लेकिन, कभी-कभी दो संतुलन भिन्न होते हैं। यदि दोनों शेष अलग-अलग हैं, तो अंतर के कारणों को जानना आवश्यक है क्योंकि इसके लिए बही खाते में प्रविष्टि पारित करने की आवश्यकता हो सकती है। अंतर रोकड़ बही या बैंक स्टेटमेंट / पास बुक में त्रुटि या भुगतान के लिए प्रस्तुत नहीं किए गए चेक या कैश बुक में दर्ज किए गए चेक को बैंक में जमा नहीं किए जाने या किसी अन्य कारण से इसके विपरीत होने के कारण हो सकता है। मतभेदों के कारणों या कारणों को दर्शाने वाला एक बयान तैयार किया जाता है। इस कथन को बैंक समाधान विवरण के रूप में जाना जाता है।


बैंक समाधान विवरण की  परिभाषाएँ

बैंक समाधान विवरण की प्रमुख परिभाषाएँ निम्नानुसार हैं-

 1. श्री कार्टर के शब्दों में, यह एक विवरण हैं, जो बैंक की पास बुक द्वारा बतलाये  शेष का रोकड़ पुस्तक के बैंक सतम्भ द्वारा बतलाये गये बैंक शेष से मिलान करने के लिए बनाया जाता है।


2. प्रो. विलियम्स के अनुसार, "बैंक द्वारा ग्राहक के लिए प्रकट की गयी बाकी और ग्राहक रोकड़ पुस्तक में आई हुई बैंक की बाकी का मिलान करने के लिए जो विवरण पत्र बनाया जाता है, ओ समाधान विवरण कहा जाता है।" 


3. बी पाटिल के शब्दों में, "बैंक समाधान विवरण यह विवरण है जो मुख्यतः पास बुक के शेष को रोकड़ बहीं के शेष से मिलाने के लिए तैयार किया जाता है। " 

संक्षेप में, "एक निश्चित तिथि को रोकड़ पुस्तक और पास बुक के बैंक शेष में पाये जाने वाले अन्तर का समाधान या निवारण करने के लिए जो विवरण बनाया जाता है, उसे बैंक समाधान विवरण कहते हैं।"


बैंक समाधान विवरण की विशेषताएँ 

(Characteristics of Bank Reconciliation Statement 

1. पृथक से तैयार करना- यह एक विवरण होता है, जो पृथक से एक कागज पर तैयार कि जाता है। हिसाब-किताब की पुस्तक में इसे कोई स्थान नहीं दिया जाता है।


2. शेषों का मिलान करना - यह विवरण रोकड़ बही के बैंक स्तम्भ के शेष और पास बुक के शेष का मिलान करने के लिए बनाया जाता है। 


3. निश्चित तिथि को बनाना - यह विवरण किसी निश्चित तिथि को बनाया जाता है।


4. ग्राहक द्वारा बनाना- बैंक समाधान विवरण बैंक के खातेदार व्यापारी अर्थात ग्राहक द्वारा बनाया जाता है, न कि बैंक द्वारा।


5. छल-कपट का पता लगाना- इस विवरण को बनाने का उद्देश्य न केवल दोनों शेषों का मिलान करना है, वरन् कपट और अशुद्धियों का पता लगाना भी है।


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