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Wednesday, July 14, 2021

लेखांकन की शब्दावली। Accounting terminology in Hindi.

लेखांकन की शब्दावली। Accounting terminology in Hindi.


लेखांकन की शब्दावली (Terminology of Accounting)




लेखांकन के अन्तर्गत कुछ विशिष्ट शब्दों का प्रयोग किया जाता है। इस विषय से सम्बन्धित इन शब्दों का विशेष अर्थ होता है, जिन्हें स्पष्ट कर देना आवश्यक होगा। कुछ प्रमुख पारिभाषिक शब्द निम्न है:-

1. व्यवसाय (Business)- ऐसा कोई वैधानिक कार्य जो आय या लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से किया गया हो, व्यवसाय कहलाता है। 'व्यवसाय' एक व्यापक शब्द है, जिसके अन्तर्गत व्यापार, उत्पादन कार्य, वस्तुओं या सेवाओं का क्रय-विक्रय, बैंक, बीमा, परिवहन कम्पनियाँ आदि आते हैं।

2. व्यापार (Trade)- लाभ कमाने के उद्देश्य से किया गया वस्तुओं का क्रय-विक्रय व्यापार कहलाता है।

3. पेशा या वृत्ति (Profession) : आय अर्जित करने के लिये किया गया कोई कार्य या साधन, जिसके) लिये पूर्व प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, को पेशा या वृत्ति कहते हैं। डॉक्टर, वकील, शिक्षक, इंजीनियर आदि द्वारा किये जाने वाले कार्य को पेशा कहते हैं। 

4. व्यावसायिक सौदे (Business Transactions)- दो पक्षों के मध्य होने वाले मुद्रा, माल या सेवा के पारस्परिक विनिमय को व्यावसायिक सौदे या लेन-देन कहते हैं। माल का क्रय-विक्रय भुगतान का देना या लेना आदि आर्थिक क्रियाएँ व्यावसायिक सौदे कहलाते हैं। 

ये सौदे व्यवसाय व्यवस्था में तीन प्रकार से प्रचलित हैं-)

(1) नकद व्यवहार (Cash Transaction). यदि लेन-देन नकद अथवा बैंक के माध्यम से तत्काल किया जाता है तो यह नकद व्यवहार कहलाता है। जैसे नकदी माल खरीदना, या नकदी माल खरीद का चैक से भुगतान करना आदि।

(2) उधार व्यवहार(Credit transactions):  कुछ सौदों का भुगतान नियत समय के बाद किया जाता है तो ऐसे व्यवहार उधार या साख (Credit) व्यवहार कहलाते हैं। जैसे- अशोक को एक माह की उधारी पर बेचा गया माल उधार व्यवहार है।

(3) विपत्र व्यवहार (Bill Transactions)- जब माल का क्रय-विक्रय विनिमय विपत्र (Bills of (Exchange) के माध्यम से होता है तो ऐसे व्यवहार को विपत्र व्यवहार कहते हैं। जैसे- रमेश ने सोहन को 5,000 रुपये का माल बेचा। इसके प्रतिफल में सोहन ने रमेश द्वारा लिखित एक निश्चित अवधि का बिल (विपत्र या हुण्डी) स्वीकार किया तो यह विपत्र व्यवहार कहलायेगा।

5. स्वामी (Proprietor ) - व्यवसाय को प्रारम्भ करने वाला व्यक्ति जो आवश्यक पूँजी की व्यवस्था, करता है तथा लाभ प्राप्त करने का अधिकारी व हानि की जोखिम वहन करता है, व्यवसाय का स्वामी कहलाता है। अलग-अलग व्यवसायों में स्वामी संगठन की प्रकृति या प्रकार पर निर्भर करते हैं।

6. पूँजी (Capital)- व्यवसाय के स्वामी द्वारा व्यवसाय को प्रारम्भ करने के लिये जो धन, रोकड़ या अन्य सम्पत्ति के रूप में लगाया जाता है, उसे पूँजी कहते हैं। व्यवसाय में पूँजी लाभार्जन के उद्देश्य से लगाई जाती है। लाभ का वह भाग जो व्यवसाय से निकाला नहीं गया है, पूँजी में वृद्धि करता है। अन्य शब्दों में, सम्पत्तियों

7. आहरण (Drawings)- व्यवसाय के स्वामी द्वारा व्यवसाय से निजी उपयोग के लिये जो माल या रोकड़ निकाल लिये जाते हैं, उसे आहरण या निजी व्यय कहते हैं। आहरण से पूँजी की मात्रा कम हो जाती है।

8. माल (Goods) - माल उस वस्तु को कहते हैं, जिसका क्रय-विक्रय या व्यापार किया जाता है। माल के अन्तर्गत वस्तुओं के निर्माण हेतु प्राप्त कच्ची सामग्री, अर्द्धनिर्मित सामग्री (Work in Progress) या तैयार वस्तुएँ (Finished Goods) हो सकती हैं। लेखांकन के अन्तर्गत माल (Goods) को क्रय, विक्रय, क्रय वापसी, विक्रय वापसी या रहतिया के रूप में लिखा जाता है।

9. क्रय (Purchases) - जब व्यापारी द्वारा विक्रय हेतु माल की खरीदी की जाती है, तो उसे क्रय कहा जाता है। यह खरीदी कच्ची सामग्री या तैयार माल के रूप में हो सकती है। सम्पत्तियों का क्रय, क्रय में शामिल नहीं है, क्योंकि ये पुनः विक्रय के लिये नहीं होती हैं।

10. विक्रय (Sales) - लाभ प्राप्ति के उद्देश्य से जब क्रय किया हुआ माल बेचा जाता है, उसे विक्रय कहते हैं। नकद माल बेचने को नकद विक्रय (Cash Sales) तथा उधार माल बेचने को उधार विक्रय (Credit) Sales) कहते हैं

11. क्रय वापसी (Purchases Return) - क्रय किये गये माल में से किसी कारणवश जो माल वापस कर दिया जाता है, उसे क्रय वापसी अथवा बाह्य वापसी (Return Outward) कहते हैं।

12. विक्रय वापसी (Sales Return) - विक्रय किये गये माल में से जो माल किसी कारणवश ग्राहक द्वारा वापस कर दिया जाता है। उसे विक्रय वापसी या अंतर वापसी (Return Inward) कहते है।

13. आगम (Revenue) - आगम से आशय ऐसी राशि से है, जो माल अथवा सेवाओं के विक्रय से नियमित रूप से प्राप्त होती है। व्यवसाय के दिन-प्रतिदिन के क्रिया-कलापों से प्राप्त होने वाली राशियाँ जैसे- किराया, ब्याज, कमीशन, बट्टा, लाभांश आदि भी आगम कहलाते हैं।

14. व्यय (Expenses) - व्यवसाय में माल, वस्तुओं तथा सेवाओं का उत्पादन या प्राप्ति करने के लिये जो लागत (Cost) आती है, उसे व्यय कहा जाता है। माल तथा सेवाओं की प्राप्ति के लिये भुगतान, व्यय के अन्तर्गत आता है। मजदूरी, भाड़ा, रेलभाड़ा तथा माल के वितरण एवं विक्रय पर भुगतान किया गया वेतन, किराया, विज्ञापन व्यय, बीमा आदि भी व्यय में शामिल हैं। संक्षिप्त में आगम में वृद्धि करने की लागत को व्यय कहते हैं।

15. खर्च (Expenditure)- खर्च वह राशि होती है, जो व्यवसाय की लाभ-अर्जन क्षमता की वृद्धि हेतु भुगतान की जाती है। खर्च लम्बी अवधि की प्रकृति से सम्बन्धित है। व्यवसाय में सम्पत्तियों के अधिग्रहण या प्राप्ति (Aquire) हेतु जो भुगतान किया जाता है, वह खर्च (Expenditure) कहलाता है।

16. आय (Income) - वह राशि जिससे व्यापार की पूँजी में वृद्धि हो, आय कहलाती है। इस राशि को ज्ञात करने के लिये आगम (Revenue) में से व्यय घटा दिये जाते हैं। जो शेष बचता है, वह आय की राशि होती है। उदाहरण के लिये, यदि आगम 25,000 रुपये हो और व्यय 12,000 रुपये हो तो आय 13,000 रुपये होगी। 'आय' एक व्यापक शब्द है, इसमें लाभ (Profit) भी शामिल रहता है। सूत्र के रूप में -

आय = आगम - व्यय

17. हानि (Loss) - जब व्यय आगम से अधिक होते हैं तो व्यय का आधिक्य हानि कहलाता है, जो कि पूँजी में कमी करता है। इसे व्यापारिक दृष्टि से सामान्य हानि समझा जाता है, जबकि आग, चोरी, बाढ़, दुर्घटना से होने वाली हानि को असामान्य हानि (Abnormal Loss) कहा जाता है।

18. लाभ (Gain) - यह एक प्रकार की मौद्रिक प्राप्ति है, जो व्यवसाय के व्यवहार के फलस्वरूप प्राप्त होती है, जैसे- यदि 1,50,000 रुपये मूल्य की सम्पत्ति को 2,00,000 रुपये में बेचा जाएगा 50,000 रुपये की प्राप्ति लाभ (Gain) कहलायेगी

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