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Saturday, January 28, 2023

MPTET varg 1 Commerce mock test sample paper | Important MCQs

MPTET Varg 1 Commerce mock test sample paper | MPTET varg 1 important questions.

MPTET varg 1 MCQs  (वस्तुनिष्ठ प्रश्न )



निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनकर लिखिए-

 
(1) लेखांकन का व्यापारियों के लिये लाभ है-

(a) कर निर्धारण में
(b) आर्थिक स्थिरता के लिये
(c) देश के विकास में
(d) मूल्य नियन्त्रण करने में
Answer: (a) कर निर्धारण में

(2) लेखांकन की शाखाएँ हैं-

(a) वित्तीय लेखांकन
(b) लागत लेखांकन
(c) प्रबंधकीय लेखांकन
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी

(3) निम्न लेखांकन सूचना की गुणवत्ता का निर्धारक तत्व नहीं है-

(a) विश्वसनीयता
(b) सरलता
(c) सम्बद्धता
(d) बोधगम्यता
Answer: (b) सरलता


(4) जिस व्यक्ति को उधार माल बेचा जाता है, उसे कहते हैं-

(a) देनदार
(b) लेनदार
(c) उत्पादक
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer: (a) देनदार


(5) व्यापारी द्वारा अपने ग्राहकों को छूट देना कहलाता है-

(a) कमीशन
(b) बट्टा
(c) दलाली
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (b) बट्टा

(6) नकद बट्टा देय होता है-

(a) उधार क्रय के समय
(b) उधार विक्रय के समय
(c) नकद भुगतान के समय
(d) किसी भी समय
Answer: (c) नकद भुगतान के समय

(7) लेखांकन सिद्धांतों का महत्व है-

(a) निवेशकों के लिए
(b) लेखापालों के लिए
(c) अंकेक्षकों के लिए
(d) उपर्युक्त सभी के लिए
Answer : (d) उपर्युक्त सभी के लिए

(8) चालू व्यवसाय की मान्यता से आशय है-

(a) व्यवसाय का बन्द हो जाना
(b) व्यवसाय का प्रारम्भ करना
(c) व्यवसाय का चलते रहना
(d) उपर्युक्त में कोई नहीं
Answer: (c) व्यवसाय का चलते रहना

(9) व्यापार के स्वामी द्वारा जब व्यापार में पूँजी लगाई जाती है तो किस अवधारणा के अनुसार उसे व्यापार का ऋणदाता माना जाता है-

(a) पृथक अस्तित्व की मान्यता
(b) लागत अवधारणा
(c) मौद्रिक मापन की मान्यता
(d) पूर्ण प्रकटीकरण की मान्यता
Answer: (a) पृथक अस्तित्व की मान्यता

(10) दोहरा लेखा प्रणाली का सिद्धान्त है-

(a) दो खातों पर प्रभाव
(c) खाते के दो पक्ष
(b) दोनों खातों में लेखा
(d) उपर्युक्त सभी
Answer: (d) उपर्युक्त सभी

(11) दोहरा लेखा प्रणाली के सही चरण हैं-

(a) प्रारम्भिक लेखा, सारांश, वर्गीकरण
(b) वर्गीकरण, प्रारम्भिक लेखा, सारांश
(c) प्रारम्भिक लेखा, वर्गीकरण, सारांश
(d) सारांश, वर्गीकरण, प्रारम्भिक लेखा ।
Answer: (c) प्रारम्भिक लेखा, वर्गीकरण, सारांश

(12) लुकास पेसियोली की पुस्तक कौनसे सन् में प्रकाशित हुई थी-

(a) 1464 में
(b) 1494 में
(c) 1484 में
(d) 1474 में
Answer:. (b) 1494 में

(13) नकलवही पुस्तक है-

(a) खाते की
(b) प्रारम्भिक लेखे की
(c) अन्तिम लेखे की
(d) वर्गीकरण की
Answer: (b) प्रारम्भिक लेखे की

(14) अव्यक्तिगत खाते कितने प्रकार के होते हैं-

(a) एक
(b) दो
(c) तीन
(d) चार
Answer: (b) दो

(15) खाता जो व्यापार के स्वामी का प्रतिनिधित्व करता है-

(a) आहरण खाता
(b) सम्पत्ति खाता
(c) क्रय खाता
(d) विक्रय खाता
Answer: (a) आहरण खाता

(16) 'माल' दान देने पर क्रेडिट किया जाता है-

(a) पूँजी खाता
(b) रोकड़ खाता
(c) क्रय खाता
(d) विक्रय खाता
Answer: (c) क्रय खाता

(17) निम्न में से किसका भुगतान करने पर आहरण खाता होगा-

(a) विक्रय कर
(b) उत्पादन कर
(c) स्थानीय कर
(d) आयकर
Answer: (d) आयकर

(18) नकलंबही (जर्नल) में लेखा किस पुस्तक से किया जाता है-

(a) क्रय पुस्तक से
(b) विक्रय पुस्तक से
(c) रोकड़ पुस्तक से
(d) स्मारक पुस्तक से
Answer: (d) स्मारक पुस्तक से

(19) स्वामी द्वारा व्यापार प्रारम्भ करने के लिए अपने मित्र से ऋण लेने पर कौनसा खाता क्रेडिट किया जाएगा :

(a) रोकड़ खाता
(b) पूँजी खाता
(c) मित्र का ऋण खाता
(d) स्वामी का खाता
Answer: (c) मित्र का ऋण खाता

(20) दोहरा लेखा प्रणाली का जनक किसे कहा जाता हैं-

(a) नॉर्थकाट
(b) जे. आर. बॉटलीबॉय
(c) लुकास पेसियोली
(d) कार्टर
Answer: (c) लुकास पेसियोली


Friday, January 20, 2023

12th Accoutancy objective(MCQs) questions in hindi

12th Accountancy objective(MCQs) questions in Hindi | Chapter 1: Accounting for Partnership.




12th Accountancy objective(MCQs) questions in hindi

नमस्कार दोस्तों , मैं प्रदीप इस ब्लॉग में लेकर आया हूँ। 12th Accountancy ,पहले अध्याय : साझेदारी लेखांकन,  के अति महत्वपूर्ण Objective प्रेश्न। 

निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनकर लिखिए-

(1) समझौते के अभाव में साझेदार द्वारा दिये गये ऋण पर ब्याज दिया जाता है-
(a) 4% प्रति वर्ष
(b) 6% प्रति वर्ष
(c) 9% प्रति वर्ष
(d) 5% प्रति वर्ष
उत्तर : (b) 6% प्रति वर्ष

(2) यदि साझेदार के आहरण की तिथियाँ नहीं दी गई हों तो आहरण पर ब्याज की गणना की अवधि होती है-

(a) 61/2 माह
(b) 5½ माह
(c) 6 माह
(d) 12 माह

उत्तर : (c) 6 माह

(3) साझेदारों के मध्य लाभ के घंटवारे के लिये बनाया जाता है-
(a) लाभ-हानि खाता
(b) लाभ हानि समायोजन खाता 
(c) साझेदारों के चालू खाते
(d) लाभ-हानि वितरण खाता

उत्तर : (d) लाभ-हानि वितरण खाता


(4) आहरण पर ब्याज है-

(a) फर्म की हानि 
(b) साझेदारों की आय 
(c) फर्म की आय
(d) उपर्युक्त में कोई नहीं।

उत्तर : (c) फर्म की आय


(5) समझौते के अभाव में साझेदारों को प्राप्त करने का अधिकार नहीं है-

(a) वेतन 
(c) पूँजी पर ब्याज
(b) कमीशन
(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर : (d) उपर्युक्त सभी

(6) साझेदार का फर्म से सम्बन्ध होता है-

(a) स्वामी और सेवक का 
(b) सेवक का 
(c) प्रबंधक का
(d) एकाधिकारी का।

उत्तर : (d) उपर्युक्त सभी

(7) साझेदारी समझौते के अभाव में पूंजी पर ब्याज दिया जाता है- 
(a) 10% वार्षिक
(b) 9% वार्षिक
(c) 6% वार्षिक
(d) किसी भी दर से नहीं।

उत्तर : (d) किसी भी दर से नहीं।

(8) साझेदारी संलेख बनाना-
(a) अनिवार्य है 
(b) ऐच्छिक है
(c) अंशतः अनिवार्य है
(d) अनावश्यक है।

उत्तर : (b) ऐच्छिक है

(9) साझेदारी संलेख के अभाव में विभाजन होता है-
(a) पूँजी अनुपात में
(b) त्याग अनुपात में
(c) समान अनुपात में
(d) आय प्राप्ति अनुपात में।

उत्तर : (c) समान अनुपात में

(10) साझेदारी व्यवसाय अधिनियम द्वारा संचालित होता है- 
(a) साझेदारी अधिनियम 1930
(b) साझेदारी अधिनियम 1932 
(d) भारतीय अनुबन्ध अधिनियम 1932
(c) कम्पनी अधिनियम 1956

उत्तर : (b) साझेदारी अधिनियम 1932 

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मेरा ब्लॉग पढ़ने के लिए धन्यवाद। 




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Tuesday, January 17, 2023

Mpboard 12th Commerce important Questions 2023 | 18 most important MCQs.

Mpboard 12th Commerce important Questions 2023 | 18 most important MCQs with Answer|Chapter 1 Accounting for Partnership.

  

12th Accountancy important questions
Accountancy important questions


 Choose the correct answer:


1. Maximum number of members in a partnership firm is:
(a) 50
(b) 15
(c) 10
(d) None of these.
Answer: (a) 50

2. In the absence of partnership deed interest on loan will be: 
(a) 10% p.a. (b) 6%. (c) 6% p.a. (d) 10%.
Answer: (c) 6% P. a.


3. In the absence of partnership deed profit is divided in:
(a) Capital ratio   (b) Equally
(c) Liability ratio.   (d) None of these.
Answer: (b)Equally


4. Liabilities of partners is: 
(a) Limited                              (b) Unlimited
(c) Limited up to capital.       (d) None of these.
Answer:(b) Unlimited


5. Partnership deed means:
(a) Rules of purchase and sale in business (b) Rules and conditions of partnership business
(c) Rules of dissolution of partnership 
(d) None of these.
Answer: (b) Rules and conditions of partnership business


6. The balance of current account of the partner will always have: 
(a) Debit balance       (b) Credit balance
(c) Either of the two  (d) None of these.
Answer: (c) Either of the two


7. Preparation of Partnership deed is:
(a) Compulsory.             (b) Voluntary
(c) Partly compulsory.  (d) Not necessary. 
Answer: (b) Voluntary


8. When the new partner brings premium (goodwill) in cash, it is transferred to:
(a) New partner's capital A/c 
(c) New partner's current A/c 
(b) Premium A/c 
(d) Bank A/c.
Answer: (b) Premium


9. Interest on drawings is:
(a) Firm's loss.         (b) Partner's income
(c) Firm's income.   (d) None of these.
Answer: (c) Firm's income.


10. On the admission of partnership the profit on revaluation A/c should be en-ter:
(a) In the capital account of all partners 
(b) In the capital account of new partners
(c) In the old partners capital account 
(d) In account.
Answer: (b) In the capital account of new partners


11. On dissolution of firm, the balance of partner's Loan A/c is transferred to:
(a) Realization A/c
(b) Partner's Capital A/c 
(c) Partner's current A/c 
(d) None of these.
Answer: (d) None of these.


12 Profit on revaluation is distributed in:
(a) Sacrificing ratio
(b) Equally
(c) Gaining ratio
(d) Old profit-sharing ratio.
Answer: (d) Old profit-sharing ratio.

13. New Ratio - Old Ratio:
(a) Sacrificing ratio  (b) Equal ratio
(c) Gaining ratio.      (d) None of these.
Answer: (c) Gaining ratio.     


14. A partnership deed is prepared:
(a) Compulsory (c) Partly compulsory
(b) Optional         (d) Unnecessary.
Answer: (b) Optional


15. Undistributed profit and reserves are transferred to:
(a) Cash A/c.    
(b) Bank A/c
(c) Partner capital A/c
(d) Profit and loss A/c.
Answer: (c) Partner capital A/c


16. Excess of actual profit over normal profit is called: 
(a) Average profit
(b) Normal profit
(c) Abnormal profit
(d) Super profit.
Answer: (d) Super profit.


17. The essential element of partnership is :
(a) To share loss
(b) To share loss & profit 
(d) To share the assets.
(c) To share profit 
Answer: (b) To share loss & profit 


18. Goodwill is :
(a) A floating assets
(b) Fixed assets
(c) A tangible assets
(d) A fictitious assets/Intangible Asset
Answer: (d) A fictitious assets/ Intangible Asset


Tuesday, January 3, 2023

वित्तीय विवरण के विश्लेषण का आशय, परिभाषा एवं उपकरण। Meaning, definition and tools of analysis of financial statements.

वित्तीय विवरण के विश्लेषण का आशय, परिभाषा एवं उपकरण। 


#वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से क्या आशय है?


उत्तर: वित्तीय विवरणों के विश्लेषण से आशय है, वित्तीय विवरणों में दर्शाये गये आंकड़ों को इस तरह से सरल रूप में वर्गीकृत कर प्रस्तुत करना, जिससे उनके आधार पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले जा सकें।


उदाहरण के लिये, वर्ष 2018 में A व्यवसाय को 5,00,000 रुपये का लाभ होता है तथा B व्यवसाय को 6,00,000 रु. का लाभ ऐसी दशा में लाभ की दृष्टि से B व्यवसाय अच्छा माना जावेगा। अब यह भी बताया जाये कि वर्ष में A व्यवसाय की बिक्री 20,00,000 रुपये तथा B व्यवसाय की बिक्री 30,00,000 रुपये रही है, ऐसी दशा में तुलनात्मक दृष्टि से प्रतिशत के आधार पर दोनों की लाभप्रदता होगी-


व्यवसाय A 

5,00,000 x 100÷ 20,00,000 = 25%, 


व्यवसाय B -

6,00,000 x 100÷ 30,00,000=  20%

इस प्रकार A व्यवसाय की लाभप्रदता की प्रवृत्ति B व्यवसाय से अच्छी मानी जायेगी। उपरोक्त तथ्य, आँकड़ों के विश्लेषण से ही स्पष्ट हुए हैं।


इस प्रकार आय विवरण तथा स्थिति विवरण में विभिन्न वित्तीय सूचनाएँ रहती हैं, जिनमें आय, व्यय, सम्पत्ति, दायित्व, पूँजी आदि मदें होती हैं। इन मदों के बीच अर्थपूर्ण सम्बन्ध को स्पष्ट करने के लिये जो 'विश्लेषण किया जाता है, उसे ही वित्तीय विवरणों का विश्लेषण करना कहते हैं।


#वित्तीय विवरणों का विश्लेषण की परिभाषा दीजिये।


उत्तर: 

जॉन मायर्स के अनुसार, ""वित्तीय विवरणों का विश्लेषण मुख्य रूप से किसी व्यवसाय के विवरणों को एक अकेले समूह द्वारा प्रकट किए गये विभिन्न वित्तीय तथ्यों के मध्य आपसी सम्बन्धों का अध्ययन करना एवं विवरणों को एक शृंखला द्वारा प्रदर्शित कर इन तथ्यों की प्रवृत्ति का अध्ययन करना है।।


वित्तीय विवरणों के विश्लेषण को निम्न रूप में भी व्यक्त किया जा सकता है-


व्यवसाय की लाभप्रदता, कार्यक्षमता, आर्थिक सुदृढता तथा भविष्य की संभावनाओं का अनुमान लगाने के लिये, विभिन्न वित्तीय तथ्यों के मध्य आपसी सम्बन्ध स्थापित कर उन्हें सरल, उपयोगी एवं आसानी से समझने योग्य बनाना ही वित्तीय विवरणों का विश्लेषण कहलाता है। इस प्रकार वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय सूचनाओं के अन्तर्सम्बन्धों को स्पष्ट करता है।


#वित्तीय विवरणों के विश्लेषण की क्या-क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: वित्तीय विश्लेषणों की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-


(1) वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय आँकड़ों का तुलनात्मक प्रस्तुतीकरण होता है। 

(2) वित्तीय विश्लेषण जटिल अंकों को सरल व स्पष्ट रूप में व्यक्त करने की एक कला है।

(3) वित्तीय विश्लेषण वित्तीय मदों में परिवर्तन को स्पष्ट करता है। 

(4) वित्तीय विश्लेषण विभिन्न वित्तीय मदों को स्पष्ट वर्गों में विभाजित करता है।

(5) वित्तीय विश्लेषण करने की अनेक विधियाँ हैं। 

(6) वित्तीय विवरण विश्लेषण वित्तीय समंकों को उपयोगी सूचनाओं में परिवर्तित करता है।


#वित्तीय विश्लेषण के क्या उद्देश्य हैं?


उत्तर:  वित्तीय विश्लेषण के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं- 

1. व्यवसाय की अर्जन क्षमता का ज्ञान- वित्तीय विवरणों के विश्लेषण का प्रमुख उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि विनियोजित की गई पूँजी पर उचित लाभ हो रहा है या नहीं।

2. शोधन क्षमता का पता लगाना- वित्तीय विश्लेषण से यह जानकारी मिल जाती है कि व्यवसाय द्वारा लिये गये अल्पकालीन एवं दीर्घकालीन ऋणों को चुकाने की स्थिति क्या है ? धन की उपलब्धता का पता लगाने के लिये ही तरलता अनुपात ज्ञात किया जाता है।

3. वित्तीय सुदृढ़ता 'की जानकारी- वित्तीय विश्लेषण इस बात की जानकारी प्रदान करता है कि व्यवसाय के विकास के लिये धन की व्यवस्था किस प्रकार से की जा सकती है ? व्यवसाय की ख्याति के अनुरूप धन प्राप्त किया जा सकता है या नहीं। 

4. उपलब्धियों का तुलनात्मक अध्ययन- व्यवसाय द्वारा जिन आर्थिक उद्देश्यों की प्राप्ति की जा चुकी है, उसकी तुलना अन्य फर्मों से की जाना चाहिये। इसके अतिरिक्त चालू वर्ष की उपलब्धियों की तुलना पिछले वर्ष से की जाना चाहिये। यह कार्य वित्तीय विश्लेषण से ही सम्भव है।

5. बजट बनाने में सहायक- वित्तीय विश्लेषण के माध्यम से वित्तीय तथ्यों को स्पष्ट किया जाता है। इन तथ्यों की सहायता से पूर्वानुमान के आधार पर भविष्य की योजनाएँ बनायी जा सकती हैं। 

#वित्तीय विवरण के विश्लेषण के लिये प्रयोग किये जाने वाली विभिन्न तकनीक, उपकरण या साधन कौन-कौनसे है?

उत्तर: इनके विश्लेषण के लिये प्रयोग किये जाने वाली विभिन्न तकनीक, उपकरण या साधन निम्नलिखित हैं-


(1) तुलनात्मक विवरण (Comparative Statements) 

(2) समान आकार के विवरण (Common Size Statements)

(3) लेखांकन अनुपात (Accounting Ratio) 

(4) प्रतिशत प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis Percentage)

(5) रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statements) (6) कोष प्रवाह विवरण (Funds Flow Statements)

(7) सम विच्छेद बिन्दु विश्लेषण ( Break Even Point Analysis)


1. तुलनात्मक विवरण

(Comparative Statements)


तुलनात्मक वित्तीय विवरण से आशय व्यवसाय के चालू वर्ष के वित्तीय विवरण की पिछले वर्षों के वित्तीय विवरणों से या दूसरी अन्य फर्म या व्यावसायिक इकाई के वित्तीय विवरणों से तुलना करके कमियों का पता लगाना है, ताकि इन्हें दूर किया जा सके। प्रायः इस प्रकार के विवरण में दो अवधियों की मदों तथा उनके आँकड़ों को इस प्रकार से प्रस्तुत किया जाता है कि उनमें हुए परिवर्तनों का सरलता से अध्ययन किया जा सके। तुलनात्मक विवरण में दो या अधिक वर्षों के आँकड़ों की तुलना की जाती है तथा देखा जाता है कि उनमें किस प्रकार का परिवर्तन हुआ है। यह परिवर्तन धनात्मक भी हो सकता या ऋणात्मक भी। वित्तीय विवरणों के तुलनात्मक अध्ययन के लिये यह आवश्यक है कि संस्था में लेखांकन सिद्धान्तों को अपनाने में एकरूपता हो तथा सभी वित्तीय विवरणों को प्राप्त करने व प्रस्तुत करने की विधि एक समान हो, अन्यथा निष्कर्ष भ्रामक हो सकते हैं।


2. समान आकार (Common Size) के विवरण 


यह ऐसे विवरण हैं, जिनमें वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों को एक समान आधार (Common Base) पर प्रतिशत के रूप में परिवर्तित किया जाता है। विवरण की प्रत्येक मद को उससे सम्बन्धित कुल राशि के प्रतिशत के रूप में दिखाया जाता है। प्रत्येक मद का प्रतिशत उसके कुल योग से सम्बन्ध को प्रदर्शित करता है। समान आकार के विवरण स्थिति विवरण एवं आय विवरण दोनों के लिये


3. लेखांकन अनुपात (Accounting Ratios)


अनुपात के द्वारा एक संख्या को दूसरी संख्या की तुलना में प्रकट किया जाता है। इससे दो भिन्न संख्याओं में आपस में सम्बन्ध स्पष्ट हो जाता है। जब वित्तीय विवरणों की विभिन्न मदों के समूह का आप में सम्बन्ध स्पष्ट किया जाता है तो यह अनुपात विश्लेषण कहलाता है। अनुपात द्वारा जटिल एवं विस्तृत आँकड़ों को सरलतम रूप में प्रकट कर उन्हें आसानी से समझने योग्य बनाया जाता है। 


4. रोकड़ प्रवाह विवरण (Cash Flow Statements)


रोकड़ प्रवाह विवरण विभिन्न साधनों से प्राप्त तथा उपयोग में लाई गई रोकड़ का एक विवरण होता है, जो व्यवसाय में उपलब्ध रोकड़ का ज्ञान कराता है। रोकड़ प्रवाह विवरण, वित्तीय विवरण का उपयोग करने वालों के लिये सूचना का कार्य करता है। इस प्रकार रोकड़ प्रवाह विवरण एक उपकरण है, जिससे व्यवसाय की तरलता एवं शोधन क्षमता का ज्ञान होता है।


5. कोष प्रवाह विवरण

(Funds Flow Statements) |


कोष प्रवाह विवरण भी वित्तीय स्थिति में परिवर्तन का एक विवरण है। कोष प्रवाह विवरण व्यवसाय की वित्तीय एवं विनियोग (Investments) सम्बन्धी क्रियाओं के बारे में आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराता है। वास्तव में यह विवरण अतिरिक्त सूचना प्रदान करने का एक साधन है, क्योंकि वित्तीय विवरण केवल परिणाम को दर्शाते हैं, जबकि वित्तीय स्थिति में परिवर्तन के विवरण अतिरिक्त सूचनाएँ उपलब्ध कराते हैं, जिससे व्यवसाय की भावी योजना बनाने में सरलता होती है। कोष प्रवाह विवरण वर्ष के दौरान कार्यशील पूँजी में हुए परिवर्तनों को दर्शाता है। इस प्रकार कोष प्रवाह विवरण उन साधनों को बताता है, जहाँ से कोष प्राप्त किये गये हो तथा इन कोषों का प्रयोग कहाँ किया गया है।


6. प्रवृत्ति विश्लेषण (Trend Analysis)


यह वित्तीय विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करने की एक सरल एवं महत्वपूर्ण पद्धति है। विभिन्न वर्षों के वित्तीय विवरणों का तुलनात्मक अध्ययन करने के लिये इनमें से किसी एक वर्ष के विवरण को आधार मानकर प्रत्येक मद को 100 मान लिया जाता है। इस आधार पर विभिन्न वर्षों की मर्दों का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है। यह प्रतिशत सम्बन्धित मद के परिवर्तन की दिशा बताता है अर्थात् कमी या वृद्धि को प्रदर्शित करता है।


7. सम विच्छेद बिन्दु विश्लेषण (Break Even Point Analysis)

किसी उद्योग में सम-विच्छेद बिन्दु वह बिन्दु होता है, जहाँ कुल लागत कुल विक्रय के बराबर होती है। अर्थात् विक्रय के द्वारा सम्पूर्ण लागत वसूल हो जाती है। इस बिन्दु पर व्यवसाय को न लाभ होता है, होनि। यदि व्यवसाय को अतिरिक्त आय प्राप्त करना हो तो उसे विक्रय में वृद्धि करना होगी।


वित्तीय विवरणों के विश्लेषण में किस उपकरण या साधन को प्रयोग में लाया जाय, यह विश्लेषण के उद्देश्य या परिस्थितियों पर निर्भर करता है।