रोकड़ प्रबाह विवरण (Cash flow Statement) का अर्थ |रोकड़ प्रबाह विवरण बनाने के उद्देश्य और महत्व।
रोकड़ प्रवाह विवरण से आशय (Meaning of Cash Flow Statement)
रोकड़ प्रवाह विवरण में व्यवसाय की उन मर्दों को सम्मिलित किया जाता है, जो रोकड़ को प्रभावित करती है। यह रोकड़ के प्रवाह के फलस्वरूप आर्थिक (वित्तीय) स्थिति में परिवर्तन का विवरण है। यह दो स्थिति विवरणों की तिथियों के मध्य रोकड़ शेष में परिवर्तन के कारणों का विश्लेषण करता है। अतः "रोकड़ प्रवाह विवरण एक विशेष अवधि के अन्तर्गत रोकड़ की प्राप्तियों (Receipts) तथा भुगतानों (Payments) का विवरण है।" इसे रोकड़ बहाब विवरण भी कहते है
" रोकड़ प्रवाह विवरण में केवल उन्हीं लेनदेनों को ध्यान में रखा जाता है, जो रोकड़ अन्तर्वाह (Inflow) और बहिर्वाह (Outflow) का सृजन करते हैं, अर्थात् ऐसे लेनदेन जिनसे संस्था की रोकड़ में वृद्धि हो तथा ऐसे लेनदेन जिनसे रोकड़ में कमी हो, को दर्शाता है।
संक्षेप में कहा जा सकता है कि, "रोकड़ प्रवाह विवरण अवधि विशेष के दौरान रोकड़ के स्त्रोतों एवं उनके उपयोग का सारांश है।" रोकड़ प्रवाह विवरण एक उपकरण होता है, जिससे व्यवसाय की तरलता एवं अल्पकालीन शोधन क्षमता का ज्ञान होता है।
रोकड़ प्रवाह विवरण बनाने के उद्देश्य या उपयोगिता या महत्व
(Objects or Utility or Importance of preparing Cash Flow Statement)
1. अल्पकालीन वित्तीय नियोजन का उपकरण (Tool of Short Term Financial Planning - रोकड़ प्रवाह विवरण व्यवसाय की अल्पकालीन वित्तीय आवश्यकताओं के लिये योजना बनाने में सहायक होता है। इसके द्वारा रोकड़ के स्रोतों तथा उनके उपयोगों की सूचनाएँ उपलब्ध होती हैं। इससे प्रबंधकों को भविष्य के लिये रोकड़ की उपलब्धता का अनुमान लगाने में सहायता मिलती है।
2. उचित शोधन क्षमता के निर्धारण में सहायक (Helpful to Ascertain the Solvency in Better Way) -रोकड़ प्रवाह विवरण से इस बात की सूचना प्राप्त होती है कि व्यवसाय की वास्तविक शोधन क्षमता की स्थिति क्या है ?
3. रोकड़ बजट निर्माण में सहायक (Helpful in preparing the Cash Budget)- रोकड़ प्रवाह विवरण भविष्य की अवधि के लिये भी तैयार किया जा सकता है। इससे भविष्य हेतु रोकड़ का बजट निर्माण करने में सहायता मिलती है। प्रबंधकों को इस बात का अनुमान लगाने में सहायता मिलती है कि किन अवधियों में रोकड़ की प्राप्तियाँ अधिक होगी एवं किन महीनों में कम।
4. रोकड़ प्रवाह की प्रवृत्ति का ज्ञान (Knowledge of the Trend of The Cash Flow) रोकड़ प्रवाह विवरण बनाने से रोकड़ की प्रवृत्ति या झुकाब की स्थिति का पता चल जाता है। इसके साथ विनियोग एवं वित्तीय क्रियाओं में रोकड़ के उपयोग का भी ज्ञान प्राप्त हो जाता है।
5. व्यवसाय की प्रगति की जानकारी (Knowledge of Progress of Business)- संचालन क्रियाओं से यदि व्यवसाय की आय में वृद्धि होती है तो यह व्यवसाय की प्रगति का सूचक माना जाता है। इसके विपरीत आय अर्थात् रोकड़ में कमी इस बात का परिचायक है कि कम्पनी अच्छे लाभ अर्जन की स्थिति में नहीं है।
