Mptet varg 1 वाणिज्य (Commerce) विषय | प्रेषण (Consignment) का क्या अर्थ है | Preshan प्रेषण meaning in Hindi |अधिभावी कमीशन | परिशोध कमीशन | Consignment meaning in Hindi.
प्रेषण व्यवहार से आशय (Meaning of Consignment Transaction)
प्रेषण (Consignment) से आशय कमीशन के आधार पर विक्रय के उद्देश्य से प्रेषक(Consignor) द्वारा प्रतिनिधि (Consignee or Agent) को माल भेजने से है।"
| प्रेषण Consignment image |
सामान्यतः प्रेषण से आशय माल भेजने से है। लेखाकर्म के अन्तर्गत उत्पादक अथवा निर्यातकर्ता अपने माल को विक्रय हेतु अपने प्रतिनिधि के पास भेजते हैं। प्रतिनिधि उस माल का विक्रय कर प्रतिफल के रूप में कमीशन (वर्तन) प्राप्त करते हैं। इस प्रकार माल के स्वामी अथवा प्रधान की ओर से विक्रय हेतु नियुक्त प्रतिनिधि को भेजा गया माल प्रेषण कहलाता है। दोनों पक्षों के मध्य हुए इस प्रकार का व्यावसायिक अनुबंध को प्रेषण व्यवहार (Consignment Transaction) कहते हैं।
मुख्यतः प्रेषण व्यवहार माल के विक्रय के सम्बन्ध में होता है, किन्तु कभी-कभी प्रतिनिधि की नियुक्ति माल के क्रय या रुपया वसूली आदि के लिये भी की जाती है। प्रेषण व्यवहार में जिस व्यक्ति द्वारा माल भेजा जाता है अथवा प्रतिनिधि नियुक्त किया जाता है, उसे प्रेषक (Consignor) या प्रधान कहते हैं तथा जिस व्यक्ति या संस्था की नियुक्ति की जाती है, उसे प्रेषणी (Consignee) या प्रतिनिधि (Agent) कहा जाता है। प्रेषणी को जो प्रतिफल प्राप्त होता है, उसे वर्तन (Commission) कहते हैं। प्रेषण व्यवहार को चालान, एजेन्सी अथवा व्यापारिक भाषा में आढ़त भी कहते हैं। प्रेषक और प्रेषणी का सम्बन्ध प्रधान (Principal) और प्रतिनिधि (Agent) का होता है।
उदाहरण के लिये, यदि टाटा मोटर्स लि. ने 250 कार अपने भोपाल स्थित सांघी ब्रदर्स को विक्रय हेतु भेजी। यहाँ टाटा मोटर्स लि. मुम्बई प्रेषक अथवा प्रधान एवं सांघी ब्रदर्स लि. इन्दौर प्रेषणी अथवा एजेण्ट कहलायेंगे। इन दोनों पक्षों के मध्य हुए व्यावसायिक व्यवहार को ही प्रेषण व्यापार कहते हैं।
प्रेषण की विशेषताएँ या लक्षण (Characteristics of Consignment)
1. माल पर स्वामित्व- प्रेषण व्यवहार में प्रेषित किये गये माल पर तथा प्रेषणी के पास अनबिके माल पर प्रेषक का ही स्वामित्व रहता है।
2. प्रतिफल प्रेषणी को उसकी सेवाओं के बदले कमीशन दिया जाता है।
3. प्रेषक के उत्तरदायित्व पर विक्रय- प्रेषण के अन्तर्गत माल का विक्रय प्रतिनिधि द्वारा किया जाता है, किन्तु इसका उत्तरदायित्व प्रेषक का ही रहता है।
4. आदेशानुसार कार्य प्रेषणी को प्रेषक के आदेश के अनुसार कार्य करना होता है।
5. उधार बिक्री पर दायित्व का हस्तान्तरण- सामान्यतः उधार बिक्री पर वसूली का उत्तरदायित्व प्रेषक का ही रहता है, किन्तु यदि प्रेषणी को परिशोध (Del-credere) कमीशन दिया जाता है, तो उधारी की राशि वसूलने का उत्तरदायित्व प्रेषणी पर आ जाता है।
6. प्रेषणी द्वारा अग्रिम राशि- प्रायः प्रेषक द्वारा माल भेजने के बदले प्रेषणी से अग्रिम राशि की मांग की जाती है।
7. बिक्री विवरण भेजना प्रेषणी द्वारा वर्षान्त अथवा किसी निश्चित समय के उपरान्त बिक्री विवरण (Accoun Sale) भेजा जाता है, जिसमें बेचे गये माल, उसके द्वारा किये गये व्यय, कमीशन आदि की जानकारी का उल्लेख रहता है। 8. प्रतिपूर्ति का अधिकार प्रेषणी को माल की विक्रय प्रक्रिया में अपने द्वारा किये गये व्ययों के
लिये प्रेषक से प्रतिपूर्ति प्राप्त करने का अधिकार होता है।
प्रेषण व्यवहार सम्बन्धी शब्दावली
(Terms Used in Consignment Transactions) प्रेषण व्यवहार में निम्नलिखित शब्दों को प्रमुख रूप से प्रयोग किया जाता है
1. प्रेषक (Consignor)- यह माल का स्वामी होता है, जो अपनी जोखिम पर माल बेचने के लिए अपने प्रतिनिधि (प्रेषणी या एजेण्ट) के पास भेजता है। इसे प्रधान (Principal) या चालानकर्ता भी कहते हैं। 2. प्रेषणी (Consignee)- यह वह प्रतिनिधि होता है, जिसे आढ़त पर माल बेचने के लिए भेजा जाता है। इसे चालान पाने वाला या एजेण्ट भी कहा जाता है।
3. अभिकरण (Agency)- माल के स्वामी और विक्रय हेतु नियुक्त प्रतिनिधि के बीच होने वाले व्यवहारों को प्रतिनिधि के दृष्टिकोण से 'अभिकरण सम्बन्धी व्यवहार' कहा जाता है। इसे आढ़त व्यापार भी कहते हैं। यहाँ स्पष्ट कर देना उचित होगा कि आढ़त एक व्यापक शब्द है। यह कई प्रकार की होती है, जैसे- माल बेचने की आढ़त, माल खरीदने की आदत, ऋण वसूल करने की आदत आदि। प्रेषण के संदर्भ में आढ़त से आशय माल बेचने से लिया जाता है।
4. प्रेषण (Consignment)- जो माल प्रेषक द्वारा प्रेषणी को कमीशन पर बेचने के लिए भेजा जाता है, उसे प्रेषण कहते हैं। इसे 'चालान' भी कहा जाता है। प्रेषक के लिए वह बाह्य प्रेषण (Consignment (Outward) और प्रेषणी के लिए आन्तरिक प्रेषण (Consignment Inward) होता है।
5. प्रेषण खाता (Consignment Account)- प्रेषण पर लाभ अथवा हानि ज्ञात करने के लिये बनाया जाने वाला खाता 'प्रेषण खाता' कहलाता है। यह एक नाममात्र का खाता (Nominal Account) है, जो लाभ-हानि खाते की भाँति बनाया जाता है।
6. प्रेषित माल (Goods on Consignment)- वह माल जो प्रेषण पर बिक्री हेतु भेजा जाता है, प्रेषित माल कहलाता है। इसका लेखा प्रेषित माल खाते में किया जाता है। प्रेषित माल खाता वास्तविक खाता है।
7. प्रेषण स्कन्ध (Consignment Stock)- आढ़त पर बेचने के लिए भेजे गये माल में से जो माल प्रेषणी के पास बिकने से रह जाता है, उसे प्रेषण स्कन्ध कहते हैं। दूसरे शब्दों में, यह प्रेषण का बिना बिका माल है, जो प्रेषणी के पास होता है। इसलिए इसे प्रेषणी के पास स्कन्ध (Stock with Agent) भी कहते हैं।
8. कच्चा या दर्शनार्थ बीजक (Profoma Invoice)- प्रेषक द्वारा प्रेषित माल के लिए एक बीजक बनाया जाता है, जिसे कच्चा बीजक या दर्शनार्थ बीजक कहते हैं। इसे सूचनार्थ बीजक भी कहते हैं। इसमें माल की प्रकृति, मात्रा, मूल्य आदि का विवरण दिया होता है।
9. विक्रय विवरण (Account Sales) प्रेषणी समय-समय पर अथवा प्रेषित माल के बिक जाने पर
उसका हिसाब प्रेषक के पास भेजता है। वह हिसाब भेजने के लिए जो विवरण पत्र तैयार करता है, उसे विक्रय विवरण या विक्री विवरण कहते हैं। इसका विस्तृत उल्लेख आगे किया गया है।
10. प्रेषण व्यय (Consignment Expenses) प्रेषण के सम्बन्ध में प्रेषक और प्रेषणी जो भी व्यय करते हैं, वे प्रेषण व्यय कहलाते हैं। प्रेषित माल का संवेष्ठन व्यय, रेलभाड़ा, रास्ते का बीमा, माल की सुपुर्दगी लेने का व्यय, ऑक्ट्राय, गोदाम किराया, बिक्री व्यय आदि प्रेषण व्यय कहलाते हैं।
11. प्रेषण व्यवहार (Consignment Transactions)- प्रेषण के सम्बन्ध में प्रेषक और प्रेषणी के बीच जो व्यवहार होते हैं, वे प्रेषण व्यवहार कहलाते हैं।
12. प्रेषणी का पारिश्रमिक या कमीशन (Remuneration or Commission of Consignee)
प्रेषणी को प्रेषण की बिक्री की व्यवस्था के लिए अर्थात् उसकी सेवाओं के प्रतिफल में जो पारिश्रमिक दिया जाता है, उसे कमीशन कहते हैं।
प्रेषणी का प्रतिफल या पारिश्रमिक (Remuneration of Consignee)
प्रेषणी को उसकी सेवाओं के बदले में प्रेषक द्वारा जो पारिश्रमिक दिया जाता है, उसे बहीखाते की भाषा में प्रेषणी का कमीशन या वर्तन कहते हैं। साधारणतया यह कमीशन, प्रेषण के बिक्री मूल्य पर प्रतिशत दर के आधार पर निश्चित किया जाता है। प्रेषणी को कमीशन निम्नलिखित रूप में दिया जा सकता है-
1. सामान्य कमीशन (Ordinary or General Commission) सामान्य कमीशन वह कमीशन है, जो प्रेषण की कुल बिक्री पर किसी निश्चित प्रतिशत दर से प्रेषणी को प्रेषक द्वारा दिया जाता है। इस प्रकार प्रेषणी जितना अधिक माल बेचता है, उसे उतना ही अधिक कमीशन मिलता है।
2. परिशोध कमीशन (Del-Credere Commission) सामान्यतया प्रेषणी, प्रेषक के उत्तरदायित्व और जोखिम पर माल बेचने का प्रबन्ध करता है। यदि प्रेषक की अनुमति से उधार माल बेचने पर ऋण की बसूली नहीं होती है, तो ऐसे डूबत ऋण की हानि प्रेषण हानि होती है, जिसे प्रेषक वहन करता है। डूबत ऋण से होने वाली हानि की जोखिम का भार प्रेषणी पर भी डाला जा सकता है। इस हेतु प्रेषक, प्रेषणी को सामान्य कमीशन के अतिरिक्त कुछ कमीशन और देता है, जिसे परिशोध कमीशन कहते हैं। संक्षेप में, परिशोध कमीशन वह पुरस्कार है, जो प्रेषक द्वारा प्रेषणी को डूबत ऋण के कारण होने वाली हानि की जोखिम का दायित्व वहन करने के लिए दिया जाता है। इसे आश्वासनार्थ कमीशन भी कहते हैं। ऐसा प्रेषणी 'परिशोध प्रेषणी' कहलाता है।
यदि प्रेषणी को परिशोध कमीशन दिया जाता है, तो प्रेषक डूबत ऋण की हानि को बहन करने के दायित्व से मुक्त रहता है। लेकिन अन्य हानियाँ, जैसे- माल चोरी होना, आग से जल जाना आदि की हानि का भार प्रेषक पर ही पड़ता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि परिशोध कमीशन पाने वाला प्रतिनिधि उधार विक्रय की दशा में डूबत ऋण होने पर स्वयं उत्तरदायी होता है। प्रेषणी की कमीशन रूपी आय डूबत की हानि से कम हो जाती है।
परिशोध कमीशन के प्रकार यह कमीशन निम्न दो प्रकार से दिया जाता है •
(1) कुल विक्रय राशि पर साधारणतया, परिशोध कमीशन की गणना कुल प्रेषण बिक्री पर ही की जाती है। किसी भिन्न या स्पष्ट निर्देश के अभाव में यह कमीशन सकल अर्थात् कुल प्रेषण बिक्री की राशि पर ही देय होता है। उपर्युक्त स्थिति में प्रश्न में प्रायः निम्नानुसार निर्देश होता है
"प्रेषणी कुल बिक्री पर 5% सामान्य कमीशन और 2% परिशोध कमीशन पाता है।" The Consignee receives ordinary commission of 5% of the gross proceeds and 2% as del-credere commission."
3. अधिभावी कमीशन (over-riding Commission)- अधिभावी कमीशन वह कमीशन है, जो प्रेषक द्वारा प्रस्तावित बिक्री मूल्य से ऊपर लिये गये बिक्री मूल्य (अधिक बिक्री मूल्य) पर एक निश्चित प्रतिशत की दर से प्रेषणी को दिया जाता है। यह एक विशेष कमीशन होता है, जो कि सामान्य कमीशन के अतिरिक्त दिया जाता है। अतः इसे अतिरिक्त कमीशन भी कहते हैं।
Nice
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